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MPRRDA: सड़क बनी, पांच साल रखरखाव भी हुआ, फिर 15 साल बाद वही सड़क सरकारी टेंडरों के घेरे में क्यों?

ग्वालियर-चंबल में ग्रामीण सड़कों पर फिर करोड़ों का मेंटेनेंस खेल_ विभागीय के दस्तावेज सवाल खड़े कर रहे

ग्वालियर। ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और गांवों तक बेहतर आवागमन उपलब्ध कराने के नाम पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित विभिन्न योजनाओं से वर्षों से सड़कें बनाई जा रही हैं। निर्माण के साथ कई सड़कों के लिए ठेकेदारों पर पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय रहती है। इसके बावजूद अब सवाल यह है कि जब सड़कें अपने निर्धारित रखरखाव चक्र से गुजर चुकी हैं, तो ग्वालियर-चंबल संभाग में इनके लिए लगातार बड़े-बड़े मेंटेनेंस पैकेज क्यों सामने आ रहे हैं?

मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) के दस्तावेजों की पड़ताल में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की तस्वीर इस सवाल को और गंभीर बनाती है। प्राधिकरण की अपनी वेबसाइट के अनुसार PMGSY के निर्माण अनुबंध में परियोजना पूर्ण होने के बाद पांच वर्ष तक ठेकेदार द्वारा performance-based maintenance का प्रावधान है। यानी सड़क की स्थिति और निर्धारित सेवा स्तर बनाए रखना ठेकेदार की जिम्मेदारी का हिस्सा है।

लेकिन 2026 में सामने आए टेंडरों में ग्वालियर और भिंड जैसे जिलों में 15 वर्ष से अधिक पुरानी ग्रामीण सड़कों के अगले पांच वर्ष के रखरखाव के लिए करोड़ों रुपए के पैकेज दिखाई दे रहे हैं।

ग्वालियर में दो पैकेज—करीब डेढ़ करोड़ का सवाल

ग्वालियर PIU से जुड़े MP14FTN009/Gwalior पैकेज के लिए 2026 में लगभग ₹46.13 लाख की अनुमानित लागत वाला मेंटेनेंस टेंडर जारी हुआ। इसके बाद MP14FTN011/Gwalior नाम के दूसरे पैकेज में अनुमानित लागत करीब ₹98.44 लाख रखी गई। दोनों ही कार्यों का स्वरूप ग्रामीण सड़कों/सीडी के पांच वर्ष के रखरखाव से संबंधित है और दोनों में सड़कें 15 वर्ष से अधिक पुरानी श्रेणी में आती हैं। अर्थात केवल इन दो ग्वालियर पैकेजों की अनुमानित राशि जोड़ें तो यह आंकड़ा करीब ₹1.45 करोड़ तक पहुंचता है।

यहां सवाल यह नहीं है कि पुरानी सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर क्यों निकाला गया। 15 वर्ष पुरानी सड़क को समय के साथ विशेष मरम्मत की आवश्यकता होना स्वाभाविक है।

असल सवाल यह है कि इन सड़कों की पिछले वर्षों में स्थिति क्या रही? किस अवधि में किस एजेंसी या ठेकेदार के पास इनके रखरखाव की जिम्मेदारी थी? कितनी राशि खर्च हुई? निरीक्षण में सड़कें किस स्थिति में पाई गईं और अब नए पांच वर्षीय रखरखाव पैकेज की आवश्यकता किस तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर तय हुई? इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।

भिंड में भी करोड़ों का मेंटेनेंस, और नया टेंडर 24 अगस्त तक

ग्वालियर-चंबल के दूसरे महत्वपूर्ण जिले भिंड में तस्वीर और ज्यादा बड़ी है।जुलाई 2026 में MP04FTN023/Bhind के लिए 15 वर्ष से अधिक पुरानी ग्रामीण सड़कों के पांच वर्ष के रखरखाव का टेंडर लगभग ₹1.86 करोड़ की अनुमानित लागत से जारी किया गया। इसकी तकनीकी एवं वित्तीय बोलियां 10 अगस्त को खोली जानी थीं। इसके बाद अगस्त 2026 में MP04FTN025/Bhind नाम से एक और पैकेज सामने आया, जिसकी अनुमानित लागत करीब ₹1.30 करोड़ है। इस निविदा की अंतिम तारीख 24 अगस्त 2026 और कार्य अवधि 1826 दिन अर्थात करीब पांच वर्ष निर्धारित है।

इस तरह केवल उपलब्ध दस्तावेजों में सामने आए इन दो भिंड पैकेजों की अनुमानित राशि ही ₹3.16 करोड़ से अधिक है। यानी ग्वालियर के करीब ₹1.45 करोड़ और भिंड के करीब ₹3.16 करोड़—सिर्फ इन चार पैकेजों को जोड़ें तो ₹4.60 करोड़ से अधिक की संभावित सरकारी व्यय राशि सामने आती है।  और यह पूरे ग्वालियर-चंबल संभाग का आंकड़ा नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले कुछ पैकेजों का आंकड़ा है।

सवाल सड़क की उम्र का नहीं, जवाबदेही की उम्र का है

MPRRDA की आधिकारिक वेबसाइट पर ठेकेदारों के खिलाफ डिबारमेंट की सूची भी उपलब्ध है। इसमें ग्वालियर से जुड़े कई नाम दर्ज हैं। सूची के 4 अप्रैल 2025 के अपडेट में Manoj Agrawal, Agrawal Construction Company सहित ग्वालियर के अन्य ठेकेदारों के नाम दर्ज हैं। सूची में बाद के क्रम में Om Shree Shanti Builders Pvt. Ltd., Shivam Sharma Construction, J.S.D. Enterprises और Ravindra Singh Tomar जैसे ग्वालियर से जुड़े नाम भी अलग-अलग पैकेजों के साथ डिबारमेंट अवधि में दर्ज हैं।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि इन सभी ठेकेदारों ने खराब सड़क बनाई या मौजूदा मेंटेनेंस टेंडरों में वही ठेकेदार शामिल हैं। लेकिन विभाग की अपनी डिबारमेंट सूची और उसी संभाग में लगातार निकल रहे ग्रामीण सड़क मेंटेनेंस पैकेज में निश्चित रूप से पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत बढ़ाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है_अगर सड़क निर्माण के साथ पांच वर्ष का रखरखाव पहले से अनुबंध का हिस्सा है, तो सड़क के जीवनचक्र में किस चरण पर उसकी गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी तय हुई? क्या प्रत्येक सड़क की फोटो, निरीक्षण रिपोर्ट, defect register और भुगतान विवरण सार्वजनिक है? पिछले पांच वर्षों में इन सड़कों के रखरखाव पर कितना खर्च हुआ? किस सड़क की हालत ऐसी हुई कि 15 वर्ष पूरे होते ही उसके लिए अगले पांच वर्ष का नया मेंटेनेंस पैकेज जरूरी हो गया?

ग्रामीण सड़क केवल डामर और गिट्टी की परत नहीं होती। वह किसान की मंडी तक पहुंच, विद्यार्थी की स्कूल तक पहुंच और गांव की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा होती है।