स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन के घटनास्थल निरीक्षण के बाद पांच जिलों में पुलिस की कार्रवाई तेज; शराब की खेप से जुड़े ठेकेदारों, मैनेजर और आबकारी अमले पर शिकंजा, तीन दुकानें निलंबित, तीन आबकारी अधिकारी-कर्मचारी भी सस्पेंड
देवास। खातेगांव क्षेत्र में अवैध शराब से भरे आयशर ट्रक से कुचलकर थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने मध्यप्रदेश में शराब के अवैध कारोबार और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। यह मामला अब महज एक पुलिस अधिकारी की मौत और फरार ट्रक चालक की तलाश तक सीमित नहीं रह गया है। जांच का दायरा हरदा के शराब ठेकों से लेकर देवास और गुजरात तक कथित शराब सप्लाई नेटवर्क, परिवहन में शामिल लोगों और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था तक पहुंच गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए विशेष पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन ने घटनास्थल पहुंचकर निरीक्षण किया। उनके साथ उज्जैन रेंज के एडीजी राकेश गुप्ता सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद पुलिस ने पांच अलग-अलग जिलों में टीमें सक्रिय कर दीं। उपेंद्र जैन ने स्पष्ट किया कि पुलिस को शराब के स्रोत, उसके गंतव्य और परिवहन में शामिल लोगों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। यानी जांच एजेंसियां अब केवल दुर्घटना के आरोपी चालक की तलाश नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की भूमिका खंगाल रही हैं।
पायलटिंग करने वाला गिरफ्तार, ठेकेदार के मैनेजर से पूछताछ
पुलिस कार्रवाई में आलीराजपुर जिले के बेहड़वा गांव निवासी केरम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह अपनी स्विफ्ट कार से शराब से भरे आयशर ट्रक की पायलटिंग कर रहा था। इस तरह शराब के परिवहन के दौरान आगे चलकर रास्ता दिखाने और निगरानी करने वाले व्यक्ति तक पुलिस पहुंच गई है।
वहीं शराब ठेकेदार के मैनेजर भूपेंद्र सिंह राणा को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर ट्रक चालक घटना के बाद से फरार बताया गया है। उसकी गिरफ्तारी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ट्रक में शराब किसके निर्देश पर भरी गई और उसे किसके पास पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी चालक से मिल सकती है।
हरदा के शराब ठेकों पर प्रशासन का शिकंजा
जांच की आंच हरदा जिले तक पहुंच चुकी है। कलेक्टर ने टिमरनी और रहटगांव क्षेत्र की तीन शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए हैं। इन दुकानों का संबंध शराब ठेकेदार पाटेंद्र जायसवाल से बताया गया है। जांच में राधाबाई की पुलिया के पास स्थित शराब दुकान से ट्रक में शराब भरे जाने की आशंका भी सामने आई है।
प्रशासन ने दुकानों के स्टॉक और शराब के रिकॉर्ड की जांच शुरू की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शराब वैध दुकान से निकली थी तो उसका परिवहन किन दस्तावेजों के आधार पर किया जा रहा था? क्या शराब की बिक्री दर्ज थी अथवा स्टॉक में दर्ज शराब को अवैध तरीके से बाहर भेजा जा रहा था? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
आबकारी विभाग के तीन अधिकारी-कर्मचारी निलंबित
शराब के कथित अवैध परिवहन के मामले में आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। हरदा जिले में सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल और आबकारी आरक्षक कृष्णपाल सिंह डोडियार सहित तीन अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन शराब के परिवहन और निगरानी में संभावित लापरवाही की जांच कर रहा है। हालांकि केवल निलंबन से विभागीय जवाबदेही तय नहीं होगी। यह भी जांचना होगा कि शराब की इतनी बड़ी खेप निकलने के दौरान संबंधित अधिकारियों को जानकारी थी या नहीं और यदि थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
एसआईटी के सामने पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की चुनौती
देवास एसपी आदित्य मिश्रा द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में शराब के वास्तविक स्रोत, ठेकेदारों की भूमिका, ट्रक के मालिक और चालक, पायलटिंग करने वाले व्यक्ति तथा गुजरात तक खेप पहुंचाने की व्यवस्था को खंगाला जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों में शराब ठेकेदार पाटेंद्र जायसवाल और राहुल जायसवाल के नाम भी चर्चा में आए हैं। हालांकि उनकी भूमिका और किसी भी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा आधिकारिक पुष्टि के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल पूरे नेटवर्क के संबंध में पुलिस की जांच जारी है।
मुख्यमंत्री ने एक करोड़ की सहायता और पत्नी को नौकरी देने की घोषणा की
थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शोक व्यक्त करते हुए उनके परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उनकी पत्नी को अनुकंपा आधार पर सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति देने की बात कही गई है।
सबसे बड़ा सवाल : शराब का कारोबार या विभागीय संरक्षण?
इस पूरे घटनाक्रम ने मध्यप्रदेश में शराब के अवैध परिवहन पर निगरानी और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शराब की खेप हरदा से निकलकर दूसरे जिलों के रास्ते गुजरात तक पहुंचाने की तैयारी में थी तो रास्ते में उसकी जांच और रोकथाम की व्यवस्था कहां थी? क्या यह केवल कुछ लोगों का अवैध कारोबार था या इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?
थाना प्रभारी की मौत ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। अब जनता की नजर इस बात पर है कि जांच केवल छोटे कर्मचारियों, मैनेजर और वाहन से जुड़े लोगों तक सीमित रहती है या शराब के स्रोत से लेकर कथित सरपरस्तों और जिम्मेदार अधिकारियों तक कार्रवाई पहुंचती है।
दिलीप पुरी की मौत के मामले में वास्तविक न्याय तभी सुनिश्चित होगा, जब ट्रक चालक की गिरफ्तारी के साथ उस पूरी सप्लाई चेन और जिम्मेदारी की भी पहचान होगी, जिसके कारण अवैध शराब का यह परिवहन संभव हुआ।
