अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और आराम की चिकित्सकीय सलाह के बावजूद क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में निरंतर सक्रिय;
जे.सी. मिल मजदूरों के बकाया भुगतान का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाकर फिर दिखाई संवेदनशीलता
भोपाल, 3 नवंबर 2026। जनप्रतिनिधि होना केवल पद और जिम्मेदारी निभाना नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख को अपना समझना और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास करना भी है। मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कार्यशैली में जनसेवा के प्रति यही समर्पण भाव दिखाई देता है। अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच भी वे जब मौका मिलता है, अपनी विधानसभा और क्षेत्र की जनता की समस्याएं सुनने तथा उनके समाधान के लिए सक्रिय नजर आते हैं। उनके लिए जनता की परेशानी केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि ऐसी जिम्मेदारी है, जिसे वे व्यक्तिगत रूप से महसूस करते हैं।
उनके इसी जनसेवा भाव का एक ताजा उदाहरण मंगलवार को सामने आया, जब उन्होंने राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर ग्वालियर की ऐतिहासिक जे.सी. मिल के मजदूरों के वर्षों से लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि लंबे समय से अपने हक की प्रतीक्षा कर रहे श्रमिकों को उनका बकाया भुगतान दिलाने के लिए ठोस पहल की जाए। यह मुलाकात महज एक सरकारी विषय पर चर्चा नहीं, बल्कि उन मजदूर परिवारों की पीड़ा को सरकार के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने का प्रयास थी, जो वर्षों से अपनी मेहनत की कमाई मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अपनी परवाह से पहले जनता की चिंता
प्रद्युम्न सिंह तोमर पिछले कुछ समय से फेफड़ों और आंतरिक संक्रमण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उपचार के लिए उन्हें दिल्ली और गुजरात जाना पड़ रहा है। चिकित्सकों ने उन्हें स्वच्छ वातावरण में रहने और पर्याप्त आराम करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित वरिष्ठ नेतृत्व भी उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आराम को प्राथमिकता देने की सलाह दे चुका है।
इसके बावजूद तोमर का जनता से जुड़ाव उन्हें क्षेत्र की समस्याओं से दूर नहीं रहने देता। जब भी अवसर मिलता है, वे लोगों से मिलते हैं, उनकी परेशानियां सुनते हैं और समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों तथा सरकार के स्तर पर प्रयास करते हैं। यही सक्रियता उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों से सीधे जुड़े जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान देती है।
जनसेवा के प्रति समर्पण ही असली पहचान
जे.सी. मिल मजदूरों के बकाया भुगतान का मामला उठाना इसी प्रतिबद्धता की एक मिसाल है। इन श्रमिकों का संघर्ष वर्षों पुराना है और उनके परिवारों को अब भी अपनी मेहनत की कमाई का इंतजार है। मुख्यमंत्री के सामने इस विषय को उठाकर तोमर ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और समस्याओं को लेकर वे अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तत्पर हैं।
बेशक, जनसेवा का मूल्यांकन केवल मुलाकातों और प्रयासों से नहीं, बल्कि समस्याओं के वास्तविक समाधान से होता है। जे.सी. मिल मजदूरों को उनका बकाया भुगतान मिलना इस पहल की सबसे बड़ी सफलता होगी। लेकिन अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बीच भी जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देना उनके समर्पण और संवेदनशीलता को जरूर रेखांकित करता है।
जनता के प्रति ऐसा जुड़ाव, उसके अधिकारों के लिए निरंतर प्रयास और कठिन परिस्थितियों में भी सेवा का संकल्प—प्रद्युम्न सिंह तोमर के इस समर्पण भाव का अभिनंदन।
