सीवर सफाई के नाम पर भुगतान और नालों में कचरा? अब ठेकेदारों की जांच की बारी
ग्वालियर। नगर निगम में सीवर सफाई और कचरा प्रबंधन के नाम पर चल रहे कथित खेल पर नवागत निगमायुक्त अभिषेक चौधरी ने पहली ही फील्ड विजिट में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रविवार सुबह शहर का जायजा लेने निकले निगमायुक्त को मेला रोड पर एक निजी वाहन नगर निगम ग्वालियर लिखे हुए मिला, जिसमें शहर का कचरा सड़क किनारे बने नाले में डाला जा रहा था। निगमायुक्त ने तत्काल संज्ञान लेते हुए वाहन को जब्त कराया और संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस काम के लिए नगर निगम ठेकेदारों को भुगतान करता है, उसी व्यवस्था से जुड़े वाहन द्वारा शहर के नाले में कचरा डाला जाना पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
निजी गाड़ी पर ‘नगर निगम ग्वालियर’ क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वाहन निजी है तो उस पर ‘नगर निगम ग्वालियर’ लिखने की अनुमति किसने दी? क्या ठेकेदार निगम के नाम का इस्तेमाल अपने व्यावसायिक काम के लिए कर रहे हैं? और यदि वाहन वास्तव में निगम के किसी ठेके से जुड़ा है तो शहर के नाले में कचरा डालने की अनुमति आखिर किस स्तर से मिली? निगमायुक्त चौधरी की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को जांच के केंद्र में ला दिया है।
दूसरी ओर, निगमायुक्त ने समय सीमा बैठक में अधिकारियों को साफ चेतावनी दी है कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने सीवर, स्वास्थ्य, पार्क और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं के तत्काल निराकरण, अधिकारियों के सुबह 7 से 9 बजे तक फील्ड निरीक्षण और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए हैं।
अब असली परीक्षा ठेकेदारों पर कार्रवाई की
शहर में सीवर सफाई का काम करने वाली कुछ फर्मों की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में निगमायुक्त के सामने अब केवल एक वाहन जब्त करने की कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय सीवर सफाई के पूरे ठेका तंत्र की जांच कराने की चुनौती है।
क्या संबंधित फर्मों को वास्तव में जितने काम का भुगतान किया गया, उतना काम जमीन पर हुआ?
क्या सीवर से निकला कचरा निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया गया या शहर के नालों में ही ठिकाने लगाया जाता रहा?
क्या ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों और उनके रिकॉर्ड की नियमित जांच होती है?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या निगम के नाम और संसाधनों का इस्तेमाल निजी ठेकेदारों द्वारा नियमों के विपरीत किया जा रहा है?
इन सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी
यदि निगमायुक्त वास्तव में व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए गंभीर हैं तो रविवार की कार्रवाई को एक उदाहरण बनाकर सीवर सफाई से जुड़ी सभी फर्मों के पुराने भुगतान, वर्क ऑर्डर, वाहन, कार्यस्थल, फोटो/जीपीएस रिकॉर्ड और वास्तविक कार्य की भौतिक जांच कराई जानी चाहिए। क्योंकि सवाल सिर्फ एक गाड़ी का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें जनता के पैसे से सीवर सफाई का भुगतान हो और उसी सफाई से निकला कचरा शहर के नालों में पहुंच जाए।
अब देखना यह है कि निगमायुक्त की यह कार्रवाई सिर्फ रविवार की एक घटना बनकर रह जाती है या फिर नगर निगम के ठेका तंत्र में वर्षों से जमी गंदगी की भी सफाई शुरू होती है।
