लाइसेंसी स्टॉल की आड़ में यात्रियों की सेहत से खुला खिलवाड़
ग्वालियर 30 मार्च 2026। रेलवे प्रशासन भले ही समय-समय पर “कार्रवाई” का दिखावा करता रहे लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्वालियर रेलवे स्टेशन अब अनाधिकृत वेंडरों का अड्डा बन चुका है। प्लेटफॉर्म से लेकर ट्रेनों के भीतर तक अमानक और संदिग्ध खाद्य सामग्री की खुलेआम सप्लाई हो रही है—और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक और तमाशाबीन बना हुआ है।
लाइसेंस की आड़ में अवैध नेटवर्क
स्टेशन पर संचालित 11 अधिकृत स्टॉल अब नियमों के पालन के बजाय अवैध वेंडरिंग के केंद्र बन चुके हैं। आरडी शर्मा एंड सन्स, एनजे फूड, आर के, कामाख्या, कमलाबाई, केडी फूड जैसे स्टॉल संचालकों द्वारा प्रत्येक ने 10 से 15 तक अनाधिकृत वेंडर “तैनात” कर रखे हैं। इस हिसाब से स्टेशन पर इनकी संख्या डेढ़ सौ के पार पहुंच चुकी है—जो रेलवे नियमों की खुली धज्जियां उड़ाने जैसा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 40-50 बाहरी लोग “ऑनलाइन डिलीवरी” के नाम पर स्टेशन में घुसकर अवैध सप्लाई कर रहे हैं। ये लोग अधिकृत वेंडरों की आड़ में बिना किसी अनुमति के प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में खाद्य सामग्री बेचते नजर आते हैं।
नियमों को ठेंगा, यात्रियों की सेहत खतरे में
इन तथाकथित वेंडरों के पास—न कोई आईडी कार्ड, न मेडिकल सर्टिफिकेट, न यूनिफॉर्म और न ही किसी प्रकार की वैध अनुमति है।
इसके बावजूद ये महंगे दामों पर घटिया और अस्वच्छ खाद्य पदार्थ बेचकर यात्रियों की सेहत से खुला खिलवाड़ कर रहे हैं।
जिम्मेदारों की चुप्पी या मिलीभगत?
इस पूरे खेल को रोकने की जिम्मेदारी वाणिज्यिक विभाग के कैटरिंग इंस्पेक्टर (CCI/DCI), सहायक वाणिज्यिक प्रबंधक, वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक, रेलवे सुरक्षा बल (RPF/GRP) और स्टेशन प्रशासन की है। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में अवैध वेंडरों का बेखौफ संचालन यह सवाल खड़ा करता है—क्या यह सब सिर्फ लापरवाही है, या फिर सुनियोजित मिलीभगत?
ग्वालियर जैसा महत्वपूर्ण स्टेशन यदि अवैध गतिविधियों का केंद्र बन जाए, तो यह न केवल रेलवे की छवि को धूमिल करता है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों को गंभीर खतरे में डालता है। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन इस खुलासे को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह “अवैध साम्राज्य ” यूं ही मूक दर्शकों की पनाह में फलता-फूलता रहेगा।
