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एक खेत, दो फसल और दोगुनी कमाई, संभाजी राव की खेती बनी प्रेरणा स्त्रोत

सफलता की कहानी: आधुनिक खेती अपनाई, सफलता खुद चलकर आई

ग्वालियर 07 अप्रैल 2026/ ग्वालियर जिले के विकासखंड डबरा के छोटे से ग्राम करियावटी के किसान श्री संभाजी राव परांदे आज पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन चुके हैं। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने सरकार द्वारा प्रोत्साहित की जा रहीं आधुनिक कृषि तकनीकें अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सही सोच और नवाचार से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

संभाजी राव ने गन्ने की खेती में इंटरक्रॉपिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर खेती का स्वरूप ही बदल दिया। पहले जहां पारंपरिक तरीकों से सीमित उत्पादन होता था, वहीं अब उनकी फसल में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। खास बात यह है कि गन्ने के साथ-साथ उन्होंने चने की खेती भी सफलतापूर्वक की, जिससे प्रति हेक्टेयर लगभग 10 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त हुआ।

उनकी सफलता के पीछे वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती का बड़ा योगदान है। उन्होंने खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाया, समतलीकरण किया और फिर गन्ने की पंक्तियों के बीच चने की बुवाई की। संतुलित उर्वरकों का उपयोग, राइजोबियम कल्चर का प्रयोग और समय-समय पर सिंचाई व फर्टिगेशन ने फसल की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया।

ड्रिप इरिगेशन प्रणाली अपनाकर संभाजी राव ने लगभग 50खेती में नवाचार प्रतिशत पानी की बचत की, जो आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण है। इससे न केवल लागत कम हुई बल्कि फसल की वृद्धि भी समान रूप से हुई। खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन में भी उन्होंने आधुनिक व जैविक उपायों का सहारा लिया। इंटरक्रॉपिंग से उन्हें आय की स्थिरता मिली है। यदि किसी कारणवश एक फसल प्रभावित होती है, तो दूसरी फसल से आय सुनिश्चित रहती है।

साथ ही चना जैसी दलहनी फसल से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ी, जिससे भविष्य की फसलों के लिए जमीन और उपजाऊ बनी। संभाजी राव की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणा है। उनकी सफल कहानी यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों में भी बेहतर तकनीक अपनाकर खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मौजूदा वर्ष को “किसान कल्याण वर्ष” घोषित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों के प्रति प्रोत्साहित करना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। संभाजी राव जैसे प्रगतिशील किसान इस अभियान की वास्तविक पहचान हैं, जो अपने प्रयासों से इस उद्देश्य को साकार कर रहे हैं ।