सिस्टम पर उठे सवाल..?
भोपाल। मध्य प्रदेश के जीएसटी विभाग में इन दिनों असामान्य तनाव और भय का माहौल देखने को मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार, विभाग के शीर्ष स्तर पर बैठा प्रशासनिक नेतृत्व ही अब अधीनस्थ अधिकारियों के लिए दबाव और असहजता का कारण बनता जा रहा है। जीएसटी कमिश्नर के कथित आक्रामक व्यवहार और कार्यशैली से विभागीय अधिकारी न केवल असंतुष्ट हैं, बल्कि मानसिक रूप से दबाव में भी काम करने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था में आयुक्त की सख्त मॉनिटरिंग को हमेशा से आवश्यक माना गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सफल नेतृत्व के लिए अधीनस्थों के साथ समन्वय और सम्मानजनक व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। आरोप है कि इस संतुलन का अभाव अब विभागीय कार्यप्रणाली को प्रभावित करने लगा है।
महिला अधिकारियों के प्रति टिप्पणी और फील्ड प्रेशर से बढ़ी नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, आयुक्त द्वारा महिला अधिकारियों के लिए “आंटी” जैसे शब्दों का प्रयोग किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे वे स्वयं को असहज और अपमानित महसूस करती हैं। यह व्यवहार न केवल पेशेवर मर्यादाओं के विपरीत माना जा रहा है, बल्कि विभाग के अंदर असंतोष को भी जन्म दे रहा है।
स्थिति और अधिक जटिल तब हो जाती है, जब फील्ड में कार्रवाई को लेकर विरोधाभासी हालात सामने आते हैं। विभाग में अभी तक अधिकारियों को चेकिंग के स्पष्ट अधिकार नहीं दिए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद आयुक्त स्तर से लगातार प्रतिष्ठानों की निगरानी और जांच का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में अधिकारी इस दुविधा में हैं—यदि बिना अधिकार के जांच करते हैं तो शिकायत पर कार्रवाई का खतरा, और यदि आदेश नहीं मानते तो वरिष्ठ के कोप का भय।
चेकिंग पावर पर रोक के पीछे ‘बड़े खेल’ की चर्चा
विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि चेकिंग पावर न दिए जाने के पीछे किसी बड़े गठजोड़ या रणनीति की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है मगर इस पर उठ रहा सवाल इसकी तार्किक पुष्टि जरूर करता है। सवाल है कि जब चेकिंग राजस्व बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, तो इस प्रावधान पर प्रभावी रूप से रोक क्यों लगाई जा रही है?
इन परिस्थितियों ने विभागीय अधिकारियों की सहनशीलता की सीमा को लगभग तोड़ने की स्थिति में पहुंचा दिया है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर न केवल विभागीय कार्यप्रणाली बल्कि प्रदेश के राजस्व तंत्र पर भी पड़ सकता है और यह मसला माननीय मुख्यमंत्री के दर पर दस्तक दे सकता है!
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस पूरे मामले को किस तरह संज्ञान में लेकर संतुलित और पारदर्शी प्रशासनिक माहौल सुनिश्चित करता है।
