भोपाल। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग में दो-तीन मलाईदार पदों के लिए करोड़ों में डील फाइनल हो गई है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के रिश्तेदार सूरज सिंह कुशवाह और ओएसडी राहुल सिंह ने भोपाल के बोर्ड आफिस के पास बने महादेव कांप्लेक्स में स्थित ठेकेदार राजेंद्र सिंह किलेदार के फ्लैट में हुई इस डील के बाद मंत्री कार्यालय से मुख्य सचिव के पास कुर्सी बदलने के खेल के प्रस्ताव पहुंचा दिए गए है। इस बार डील में मुख्य सचिव अनुराग जैन का नजदीकी रिश्तेदार बताने वाले कोई श्रीमान सुराना भी शामिल होना बताया जा रहा है, जो राजधानी में 74 बंगले से सटी निशांत कालोनी में रहते हैं। यह खबर सूत्र एवं विभागीय और इलेक्ट्रॉनिक गलियारों में चर्चाओं के आधार पर है जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यदि मुख्य सचिव इन प्रस्तावों को मुख्यमंत्री मोहन यादव तक नहीं ले गए और उन्होंने अपने स्तर पर ही फैसला किया तो जल्दी ही हर महीने करोड़ों रूपए की काली कमाई कराने वाले दोनों पदों पर नई पदस्थापनाएं हो सकती हैं। इन दो पदों में भोपाल राजधानी परिक्षेत्र के चीफ इंजीनियर और ब्रिज के स्वतंत्र प्रभार वाले चीफ इंजीनियर का पद शामिल है। इन कमाई वाले पदों के लिए भारी भरकम डील करने वाले दो अधिकारियों को उपकृत करने के लिए 3 प्रभारी चीफ इंजीनियरों की पदस्थापना में फेरबदल किया जाएगा।
हाल ही में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के प्रमाणिक आरोप के बावजूद हाईकोर्ट में भारी लेनदेन करके बर्खास्तगी से बच निकलने वाले ग्वालियर के प्रभारी चीफ इंजीनियर वी के अरख और भोपाल राजधानी परिक्षेत्र की चीफ इंजीनियर की कुर्सी पर बैठे संजय मस्के ने मंत्री सिंडिकेट से यह डील की है। भोपाल में राजधानी परिक्षेत्र का चीफ इंजीनियर बनने के लिए साल भर से हाथ पैर मार रहे ग्वालियर के प्रभारी चीफ इंजीनियर वीके झा की मंत्री जी से जुड़े सिंडीकेट के साथ भारी भरकम पेशगी संबंधी रस्म अदायगी होना बताया जा रहा है!
वहीं इससे प्रभावित होने राजधानी परिक्षेत्र के मौजूदा चीफ इंजीनियर संजय मस्के ने भी इस डील की भनक मिलते ही अपनी कुर्सी बचाने की कवायद शुरू कर दी है। उन्हें इस पद पर हो रही बेशुमार अवैध कमाई बंद होने के साथ नर्मदापुरम की चहेती महिला ठेकेदार की निर्माण कंपनी यू वी इन्फ्रास्ट्रक्चर और विभागीय इवेंट में करोड़ों रुपए के काम करने वाली भोपाल में एक पब की संचालिका की चिंता सता रही है। इसके चलते उन्होंने भी ट्रांसफर पोस्टिंग के खेल में माहिर सूरज कुशवाह, राहुल सिंह और सुराना की तिकड़ी से डील की है। इस डील के मुताबिक इस मलाईदार कुर्सी से हटाने के बाद संजय मस्के को ब्रिज का प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाया जाएगा ताकि उनकी काली कमाई पूरी तरह से बंद ना हो सके।
इस डील से प्रभावित होने वाले ब्रिज के वर्तमान प्रभारी चीफ इंजीनियर पी सी वर्मा को ग्वालियर में पीआईयू का प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाया जा रहा है। हालांकि वे भोपाल में रहने या वीके झा के राजधानी आने से ग्वालियर में खाली हो रही कुर्सी पाने के इच्छुक थे, लेकिन इस साल दिसंबर में अपने रिटायरमेंट को देखते हुए वे इस सिंडीकेट को मनचाही पोस्टिंग के लिए एक बड़ी रकम देने को तैयार नहीं हुए नतीजन उन्हें एक सूखी कुर्सी पर बैठाया जा रहा है। यदि पीसी वर्मा भी तयशुदा रश्म कब अदाएगी के लिए तैयार हो जाते तो उन्हें इस सिंडीकेट से जुड़े ग्वालियर बी एंड आर के प्रभारी चीफ इंजीनियर वी के झा की चांदी उगलने वाली कुर्सी मिल सकती थी। गौरतलब है कि मंत्री जी के सिंडीकेट से जुड़े वी के झा रिश्वत के रूप में लाखों रुपए कीमत वाले पेन पसंद करते हैं और उन्हें कम दाम पर वापस करके नगदी उठाने के लिए भी जाने जाते हैं।
जानकारी के मुताबिक विभागीय मंत्री के दोनों सिपाह सालारों ने इस डील के बाद विभागीय मंत्री राकेश सिंह और श्रीमान सुराना ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को साधने की जिम्मेदारी ले रखी है। यदि सब कुछ इस सिंडीकेट द्वारा तैयार स्क्रिप्ट के मुताबिक चला तो जल्दी ही तीन प्रभारी चीफ इंजीनियरों की काली कमाई वाली कुर्सियां आपस में बदल सकती हैं।
