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मध्य प्रदेश में आरटीओ चेकिंग की नई व्यवस्था फेल? (Part 1)

ज़मीनी हकीकत में अराजकता, सिस्टम ठप होने की कगार पर..

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 1 जुलाई 2024 को गुजरात मॉडल की तर्ज पर प्रदेश में परिवहन विभाग की सभी चेक पोस्ट (इंटीग्रेटेड) बंद कर नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय भले ही नीतिगत रूप से सराहनीय रहा हो, लेकिन बिना प्रदेश की भौगोलिक, प्रशासनिक और सामाजिक परिस्थितियों का समुचित मूल्यांकन किए इसे लागू करना_ जल्दबाजी जैसी प्रतीत हो रही है।

नतीजतन, जहां एक ओर विभागीय जमीनी अमला कई जगह “सैंडविच” की तरह पिस रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवहन व्यवस्था में खुली अराजकता का माहौल बन हुआ है और अवैध वसूली का आलम भी खत्म नहीं हो रहा है।

मैदान में हड़कंप: आयुक्त की सख्ती के बीच चेकिंग लगभग ठप

सूत्र अनुसार_ परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने अव्यवस्थाओं से तंग आकर पुलिस बल के साथ प्राइवेट कटरों के खिलाफ अभियान छेड़ा है। इस कार्रवाई ने जहां अवैध तंत्र को झटका दिया है, वहीं दूसरी ओर पूरे प्रदेश में आरटीओ चेकिंग लगभग बंद जैसी स्थिति में पहुंच गई है।

सूत्रों और विशेषज्ञों का मानना है कि आयुक्त का यह कदम एक ओर नया प्रयोग है, तो दूसरी ओर यह चेकिंग व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में बढ़ता संकेत भी माना जा रहा है।

काले अतीत की जड़ें आज भी जिंदा: सिंडिकेट राज ने बिगाड़ी व्यवस्था की नींव

वर्ष 2019 से 2023 के बीच चेक पोस्टों पर अवैध वसूली का जो संगठित खेल चला, उसने आज की नई व्यवस्था को अंदर तक खोखला कर दिया है। उस दौर में परिवहन विभाग को सिंडिकेट की तरह संचालित करने वाले कुछ अधिकारी, उनके संरक्षक राजनेता और कथित पत्रकार/यूट्यूबर आज भी इस अराजकता के मुख्य सूत्रधार बने हुए हैं।

यही वह काला दौर था, जिसने प्राइवेट कटर, ब्लैकमेलिंग पत्रकारिता और स्वार्थी राजनीतिक हस्तक्षेप को जन्म दिया।यदि उस समय पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्तियों की निष्पक्ष जांच हो, तो हजारों-लाखों करोड़ की अवैध संपत्ति उजागर हो सकती है—जिसका उदाहरण तत्कालीन परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा जैसे मामलों से मिलता है।

स्पष्ट है कि केवल नई व्यवस्था लागू कर देने से सुधार संभव नहीं। जब तक इस “काले अतीत” की जड़ों को उखाड़कर खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक यह नई व्यवस्था भी “पुरानी खटिया पर नई टाटिया” साबित होती रहेगी।

(क्रमशः-द्वितीय भाग में खुलेंगे समाधान और अंदरूनी खेल के बड़े खुलासे)