दो सप्ताह से मुख्य सचिव की ई-मेल पर ई-फाइलें पेंडिंग, कार्यपालिका की कार्यशैली पर गंभीर सवाल ?
भोपाल 6 मार्च 2026। मध्यप्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक ओर प्रदेश की मोहन यादव सरकार जहां प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, गतिशीलता और जवाबदेही लाने के उद्देश्य से 1 जुलाई 2025 से पूरे प्रदेश में ई-फाइलिंग व्यवस्था लागू कर चुकी है तो वहीं मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव अनुराग जैन के अवकाश पर जाने से तमाम महत्वपूर्ण कार्य पेंडिंग पड़े होना बताया जा रहा है।
बता दें कि मुख्य सचिव जैन के अवकाश जाने पर उनका प्रभार अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश राजौरा को जरूर सौंपा गया है, मगर सूत्रों की माने तो मुख्य सचिव की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर आने वाली अनेक महत्वपूर्ण ई-फाइलें करीब दो सप्ताह से न जाने क्यों लंबित पड़ी हुई हैं?
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रभारी साहब की जिन फाइलों से तत्कालिक लाभ या विशेष रुचि जुड़ी होती है, उनके निपटारे में तो तेजी दिखाई जाती है, लेकिन अन्य नियमित प्रशासनिक ई-फाइलें अब तक लंबित पड़ी हैं। सवाल यह उठता है कि यदि मुख्य सचिव अवकाश पर हैं और उनका प्रभार राजेश राजौरा को दिया गया है, तो फिर फाइलों का निपटारा क्यों नहीं हो पा रहा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मध्य प्रदेश शासन की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था किसी एक अधिकारी की मौजूदगी पर ही निर्भर है? अगर मुख्य सचिव छुट्टी पर हैं तो क्या इसे यह माना जाए कि प्रदेश की सरकार भी छुट्टी पर चली गई है?
मुख्य सचिव प्रदेश की कार्यपालिका का सर्वोच्च प्रशासनिक पद होता है, जहां से शासन के अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। ऐसे में यदि मुख्य सचिव के अवकाश के दौरान प्रभारी अधिकारी के होते हुए भी “ई-फाइलें निपटने के बजाय उनके लौटने का इंतजार करती रहें” तो यह प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव की इस बीमारू कार्य प्रणाली में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा स्वस्थ्य राज्य की कामना करना_ महज एक दिवा स्वप्न प्रतीत होता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि_ क्या लंबित फाइलों का निपटारा शीघ्र होगा या फिर मध्यप्रदेश सरकार की अधिकांश कार्य एवं कार्यवाहियां मुख्य सचिव जैन के अवकाश से लौटने तक उनकी बाट जोहती रहेगी ?
