स्कूल शिक्षा टेंडरों में बड़े घोटाले के आरोप, SIT जांच की मांग
भोपाल 19 मार्च 2026। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल में वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुए टेंडरों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और संगठित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने 2026 में जारी नई टेंडर प्रक्रिया पर भी वही गड़बड़ियां दोहराए जाने की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने पत्रकार वार्ता में कहा कि यह मामला केवल पुराने टेंडरों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान प्रक्रिया में भी वही पैटर्न दोहराए जाने की संभावना है। “इसी आशंका के चलते हम यह मुद्दा सार्वजनिक कर रहे हैं, ताकि संभावित भ्रष्टाचार को रोका जा सके,” उन्होंने कहा।
2023 का टेंडर: लागत दोगुनी, प्रतिस्पर्धा सीमित करने के आरोप
नायक ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा कंप्यूटर, यूपीएस और प्रिंटर की खरीदी के लिए जारी टेंडर की लागत ₹40 करोड़ से बढ़ाकर करीब ₹90 करोड़ कर दी गई।
उनके अनुसार, टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें जोड़ी गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई और उपकरण बाजार मूल्य से 200–250% अधिक कीमत पर खरीदे गए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में ठेकेदार द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की गई थी और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की बात सामने आई थी। लोकायुक्त स्तर पर जांच शुरू होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
2025 का मामला: इंटरएक्टिव बोर्ड टेंडर पर भी सवाल
कांग्रेस ने वर्ष 2025 में इंटरएक्टिव बोर्ड की खरीदी में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए। नायक के अनुसार, इस टेंडर में भी तकनीकी शर्तों के जरिए प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया।
उन्होंने दावा किया कि ₹60–70 हजार कीमत वाले उपकरण ₹1.10 लाख से अधिक में खरीदे गए।
Acer को बाहर कर, उसी के उपकरण खरीदे जाने का आरोप
नायक ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया से बाहर की गई कंपनी Acer के ही उपकरण अंततः सप्लाई किए गए।
“यह दर्शाता है कि टेंडर प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई थी और वास्तविक निर्णय पहले ही तय किए जा चुके थे,” उन्होंने कहा।
2026 के टेंडर पर आशंका
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि वर्तमान में प्रदेश स्तर पर इंटरएक्टिव बोर्ड की केंद्रीकृत खरीदी के लिए जारी टेंडर में भी पुराने पैटर्न दोहराए जा सकते हैं। “तकनीकी शर्तों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा सीमित कर, उपकरणों की खरीदी दो से ढाई गुना कीमत पर की जा सकती है,” नायक ने आशंका जताई।
पूरे प्रकरण में “विंध कोठी” का नाम सामने आने का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने कई सवाल उठाए:
वहां ठेकेदारों का जमावड़ा क्यों लगता है?
अश्विन नाटू किस अधिकार से वहां से ठेकेदारों को निर्देश देते हैं?
उनका इस स्थान से आधिकारिक संबंध क्या है?
विभिन्न विभागों की टेंडर प्रक्रिया में इस स्थान का नाम बार-बार क्यों सामने आता है?
कांग्रेस की प्रमुख मांगें है_2023 से अब तक के सभी टेंडरों की SIT से जांच, सभी भुगतानों का फॉरेंसिक ऑडिट एवं
संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों की भूमिका की जांच हो।
पत्रकार वार्ता में स्वदेश शर्मा, कुंदन पंजाबी, विवेक त्रिपाठी, जितेंद्र मिश्रा, राहुल राज, अमित तावड़े और प्रतिभा विक्टर उपस्थित रहे।
