जबलपुर 13 मार्च 2026। मध्य प्रदेश में पीडब्ल्यूडी के बंगलो पर कब्जे के साथ-साथ जबलपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित विश्राम भवन क्रमांक-2 परिसर में स्थित डांक बंगला इन दिनों प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह विश्रामगृह (rest house) मुख्यतः मध्यप्रदेश से आने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों और High Court में काम से आने वाले सरकारी अधिकारियों के ठहरने के लिए बनाया गया है। इस रेस्ट हाउस में कुल 18 कक्ष हैं।
सूत्रों के अनुसार इन 18 कमरों में से लगभग 5 कक्षों पर स्थायी रूप से मंत्री खेमे का कब्जा होने की चर्चा है। बताया जाता है कि ये कमरे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह से जुड़े निजी कर्मचारियों, निजी मेहमानों और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं को ठहराने के लिए आरक्षित रखे जा रहे हैं। विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि इस प्रकार किसी सार्वजनिक विश्रामगृह के कमरों को निजी उपयोग के लिए स्थायी तौर पर आरक्षित रखना बिल्कुल गलत है, इसका कोई स्पष्ट नियम नहीं है।
जानकारों और आमजन का कहना है कि जबलपुर से पहले भी कई बड़े जनप्रतिनिधि रहे—यहां तक कि विधानसभा अध्यक्ष और कई मंत्री भी इसी शहर से रहे हैं। श्रवण पटेल भी लोक निर्माण मंत्री रह चुके हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में भी विश्रामगृह के कमरों को निजी या राजनीतिक उपयोग के लिए स्थायी रूप से आरक्षित करने जैसी व्यवस्था सामने नहीं आई थी। सूत्र यह भी कहते हैं कि कुछ कमरों के आवंटन और उपयोग में मंत्री जी के बेहद चहेते सूरज सिंह कुशवाह और राहुल सिंह का भी प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताया जा रहा है। विभाग के भीतर यह भी चर्चा है कि जो भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाता है, उसे ही विश्रामगृह में कमरा आवंटित करने का प्रस्ताव देकर मामला शांत करने की कोशिश की जाती है।
सरकारी विश्रामगृह का उद्देश्य बाहर से आने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को अस्थायी आवास की सुविधा उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यदि वास्तव में कमरों को निजी मेहमानों या राजनीतिक उपयोग के लिए स्थायी तौर पर रोक लिया गया है, तो यह व्यवस्था कई सवाल खड़े करती है।
इसी संदर्भ में विभागीय गलियारों में एक कहावत भी दोहराई जा रही है _“दिया तले अंधेरा”। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले पर क्या स्थिति स्पष्ट करता है।
