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MPRDC एक्सेस परमिशन मामला: विभागीय पक्ष के बाद तस्वीर साफ

पड़ताल का फोकस अब अनुमति शाखा पर, एचआर सीजीएम का रोल नहीं.

भोपाल। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) में एक्सेस परमिशन को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। विभागीय पक्ष सामने आने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि मुख्य महाप्रबंधक (HR) प्रदीप जैन स्तर पर इस प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है, क्योंकि यह कार्य उनके अधिकार क्षेत्र में शामिल नहीं है। अतैव आधिकारिक जिम्मेदारियों के दायरे स्पष्ट होने के बाद अब फोकस बदल गया है।

सूत्रों की माने तो एक्सेस परमिशन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया, जो सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन से सीधे जुड़ी है, उसमें प्रक्रियागत पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि विभागीय मुख्यालय इस प्रक्रिया को भारत सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय (MoRTH) से अडॉप्टेड बताते हुए पूरी तरह से ऑनलाइन एवं पारदर्शी होने का दावा कर रहा है।

सवालों के केंद्र में अनुमति शाखा के साथ संभागीय प्रबंधन..

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक्सेस परमिशन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया मुख्यतः अनुमति शाखा के स्तर पर संभागीय प्रबंधन की फील्ड रिपोर्ट एवं अनुशंसा पर संचालित होती है। पेट्रोल पंप की तिराहे- चौराहे से दूरी, एंट्री और एग्जिट प्वाइंट, डीसलेशन और एक्सीलेशन लेन एवं ROW और इस भूमि पर अनाधिकृत अतिक्रमण इत्यादि संबंधी कई सवाल जगह- जगह खड़े दिख रहे।

जहां मैन है वहां मैनिपुलेशन स्वाभाविक है, लिहाजा सवाल और युग क्रांति की पड़ताल का दायरा भी इन्हीं के इर्द-गिर्द हैं।