वर्दीधारी अमले के बीच रसूखधारी अदाज में मौजूदगी पर उठे सवाल, विभाग से ड्यूटी और ड्रेस कोड पर स्पष्टीकरण की मांग
इंदौर। अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की हालिया बड़ी कार्रवाई में करीब 55 लाख रुपये की शराब पकड़े जाने के दावे के बीच कार्रवाई की तस्वीरों ने एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है। तस्वीरों में जहां कार्रवाई में शामिल कई कर्मचारी वर्दी में नजर आ रहे हैं, वहीं उनके बीच एक संबंधित अधिकारी सिविल ड्रेस में रत्न जड़ित आभूषणों के साथ रहीसी अंदाज में दिखाई दे रहे हैं_ वह इंदौर के सहायक जिला आबकारी अधिकारी (ADEO) मनोज अग्रवाल है।
सवाल शराब जब्ती से ज्यादा अब इस बात को लेकर उठ रहा है कि यदि संबंधित अधिकारी सरकारी कार्रवाई और अभियान का हिस्सा थे, तो वे निर्धारित वर्दी में क्यों नहीं थे?
सरकारी कार्रवाई में ड्रेस कोड का पालन हुआ या नहीं?
आबकारी विभाग का फील्ड अमला शराब तस्करी और अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान पहचान योग्य सरकारी टीम के रूप में काम करता है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि Adeo अग्रवाल को यह ज़रूरत क्यों महसूस नहीं हुई और क्या उनके पद पर फील्ड ड्यूटी के दौरान वर्दी अथवा निर्धारित ड्रेस का प्रावधान लागू है।
विभाग से सवाल है कि_
- क्या संबंधित अधिकारी उस समय सरकारी ड्यूटी पर नहीं थे?
- क्या वे 55 लाख रुपये की शराब जब्ती वाली कार्रवाई का हिस्सा नहीं थे?
- यदि हां, तो सिविल ड्रेस में कार्रवाई में शामिल होने की अनुमति किस सक्षम अधिकारी ने दी?
- क्या ऐसी विशेष अनुमति आबकारी आयुक्त अथवा अन्य वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई थी?
- यदि कोई अनुमति नहीं थी तो क्या इसे विभागीय /वर्दी अनुशासन का विषय माना जाएगा?
- क्या इस अधिकारी पर सहायक आयुक्त आबकारी इंदौर अभिषेक तिवारी की पकड़ कमजोर हैं ?
तस्वीर में अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में
यह पूरा मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तस्वीरों में

संबंधित अधिकारी अन्य कर्मचारियों के साथ कार्रवाई स्थल पर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी आधिकारिक भूमिका क्या थी और कार्रवाई के दस्तावेजों में उनकी जिम्मेदारी किस रूप में दर्ज है।
तस्वीर में अग्रवाल के हाथ में दिखाई दे रहे आभूषण भी चर्चा का विषय बने हैं, यद्यपि तस्वीर के आधार पर उनकी कीमत, स्वामित्व अथवा आय के स्रोत पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन उनका यह रहीसी अंदाज इनके वेतनमान से मेल नहीं खाता और कहीं ना कहीं आय से अधिक संपत्ति की ओर इशारा करता है? यदि विभाग के पास संपत्ति विवरण से संबंधित कोई निर्धारित प्रक्रिया है तो उसका पालन इन हीरा एवं अन्य रत्न जड़ित लाखों के आभूषणों की खरीदी में नहीं हुआ होगा और न ही इनकी खरीदी से पूर्व विभाग से अनुमति ली गई होगी! यह कंफर्म है, हालांकि यह अलग प्रशासनिक विषय है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कार्रवाई के दौरान वर्दी ना पहनने के सवाल पर हैरानी व्यक्त करते हुए इतना जरूर कहा कि “यह दबंगई का स्टाइल है हमें वर्दी पहने अथवा नहीं पहनने से कोई फर्क नहीं पड़ता”।
