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एमपीबीडीसी में भर्ती पर उठे सवाल, फिक्सिंग के सबूत उजागर

हाईकोर्ट की रोक के बावजूद नियुक्तियां, मुख्य सचिव ने लगाई एमडी को फटकार

भोपाल 11 दिसंबर 2025। मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) पर गंभीर आरोपों की बौछार हो गई है। याचिकाकर्ता सतीश कुमार डोंगरे द्वारा दायर रिट याचिका WP 36025/2025 पर सुनवाई चल रही थी और इसी बीच निगम के अधिकारियों ने विवादित भर्ती प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखते हुए नियुक्तियां कर डालीं जिस पर लगातार सवाल और प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है।

पहले नियुक्ति बाद में रिजल्ट: के क्रम में मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में कार्यरत संविदा उपयंत्री महेश अहिरवार को सहायक महाप्रबंधक (सिविल/संविदा) के पद पर 14 नवंबर 2025 को नियुक्त किया गया, जबकि लिखित परीक्षा व साक्षात्कार का परिणाम 28 नवंबर 2025 को घोषित किया गया। सूत्रों एवं असंतुष्ट विशेषज्ञों की राय में यह क्रम खुद इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि भर्ती प्रक्रिया पहले ही फिक्स थी, पदों की खरीद-फरोख्त हुई, चयन परिणाम तो केवल औपचारिकता साबित हुए।

उपमहाप्रबंधक भर्ती में भी हाईकोर्ट की रोक को ठेंगा..

सूत्रों एवं असंतुष्टों की माने तो इस प्रक्रिया में हाई कोर्ट के आदेश की स्पष्ट अवहेलना गई है। उपमहाप्रबंधक पद की भर्ती पर भी याचिका दायर थी परंतु इसकी भी खुलेआम अवहेलना की गई। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बावजूद पूर्व से कार्यरत चंद्रमणि मिश्रा एवं योगेंद्र सिंह चौहान को 19 नवंबर 2025 को उपमहाप्रबंधक पद पर नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया।

यह पूरा मामला अब संस्थागत मिलीभगत और भर्ती फिक्सिंग का गंभीर रूप ले चुका है, जिसकी जांच के लिए SIT गठित किए जाने की मांग उठ गई है।

महाप्रबंधक तकनीकी नियुक्ति: हाईकोर्ट को भी अनसुना!

भूपेंद्र सिंह द्वारा दायर याचिका WP 43124/2025 में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ किया कि महाप्रबंधक तकनीकी के लिए अजय श्रीवास्तव ही योग्य घोषित हैं। इसके बावजूद निगम के प्रबंध संचालक,मुख्य महाप्रबंधक और प्रबंधक ने न्यायालय के आदेशों को लगातार नज़रअंदाज़ किया और अयोग्य व्यक्ति को पद पर बनाए रखा।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि_प्रमुख अभियंता के पद की नियुक्ति का अधिकार केवल प्रबंध संचालक के पास है। फिर भी ₹45,000 मासिक वेतन पाने वाले मैनेजर अमरेश सिंह ने अपने हस्ताक्षर से प्रमुख अभियंता का नियुक्ति आदेश जारी कर दिया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि निगम में भ्रष्टाचार का खुला प्रदर्शन है।

मंत्रालय की बैठक में सीबी चक्रवर्ती पर फटकार..

कल 10 दिसंबर 2025 को मंत्रालय में हुई संचालन मंडल की बैठक में मुख्य सचिव ने MPBDC के MD सीबी चक्रवर्ती को जमकर फटकार लगाई। स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि “भर्ती प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ी की गई है, आपके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज की जा सकती है”। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने कहा कि भवन विकास निगम ने भ्रष्टाचार और विवादित नियुक्तियों के कारण पूरे लोक निर्माण विभाग की छवि खराब कर दी है।

MPBDC में हुई भर्तियों को लेकर अब तक के खुलासे यह साफ कर रहे हैं कि: फर्जी तरीके से भर्ती, हाईकोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना, नियमविरुद्ध नियुक्ति आदेश और नीचे के स्तर के कर्मचारियों द्वारा वरिष्ठ पदों की असंवैधानिक नियुक्ति को अंजाम दिया गया है। यह पूरा मामला अब एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आ रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पर कार्रवाई अनिवार्यता नजर आ रही है ?