विभागीय संरक्षण में फल-फूल रहा ‘बरनवाल साम्राज्य’
भोपाल/प्रदेश ब्यूरो। युग क्रांति द्वारा पूर्व प्रकाशित खबर
“27 सौ से 27 करोड़ तक: नटवरलाल की गाथा”
(लिंक: https://yugkranti.org/?p=12216)
में जिन तथ्यों और किरदारों का खुलासा किया गया था, उसी सिलसिले में टोल टैक्स से जुड़े एक और बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। मध्यप्रदेश में एमपीआरडीसी (MPRDC) द्वारा संचालित टोल प्लाजाओं की सच्चाई सरकारी फाइलों और जमीनी हकीकत के बीच भारी टकराव/विरोधाभास को उजागर कर रही है।
सबसे गंभीर और शर्मनाक पहलू यह है कि इन्हीं 13 टोल प्लाजाओं में वे पांच टोल नाके भी शामिल हैं, जिन्हें महिला स्व-सहायता समूहों (WSHG) को रोजगार और आत्मनिर्भरता देने के उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इन टोल नाकों पर महिलाओं की जगह निजी कंपनी का कब्जा है।
यह पूरा मामला युग क्रांति के पूर्व खुलासों में सामने आए संजय बरनवाल नेटवर्क के टोल टैक्स साम्राज्य की ओर सीधा इशारा करता है।
17 में से 13 टोल निजी कंपनी के कब्जे में, स्व-सहायता समूहों के साथ सबसे बड़ा धोखा
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में एमपीआरडीसी द्वारा स्वयं संचालित बताए जा रहे 17 टोल प्लाजाओं में से 13 पर वसूली निजी कंपनी MPSD-FORCE प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की जा रही है। इनमें वे पांच टोल नाके भी शामिल हैं जो महिला स्व-सहायता समूहों (WSHG) के लिए अधिसूचित थे लेकिन महिलाओं को टोल संचालन सौंपा ही नहीं गया। विभागीय पोर्टल पर केवल “Propose for WSHG” लिखकर खानापूर्ति के साथ-साथ आंखों में धूल झोंकने का काम किया गया है और वास्तविक कब्जा निजी कंपनी के पास है।
यह न केवल महिलाओं के अधिकारों पर डाका है, बल्कि सरकारी योजनाओं का सुनियोजित अपहरण भी है।
कागजी डायरेक्टर्स, असल मालिक कोई और
दस्तावेजों में MPSD-FORCE प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर्स और शेयर होल्डर के रूप में मोहम्मद नावेद क़ाज़ी, क़ाज़ी अब्दुल अज़ीज़ और क़ाज़ी अब्दुल गनी के नाम दर्ज हैं।
लेकिन विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि ये सभी नाम केवल मुखौटे हैं, जबकि इस कंपनी और पूरे टोल नेटवर्क का असल संचालक और नियंत्रक संजय बरनवाल है। कागजी खानापूर्ति और दिखाए के लिए इन काजी ब्रदर की कंपनी कार्यरत है मगर असल में इस गोरख धधे पर कमांड रखने वाले तथाकथित इस नटवरलाल की पत्नी और साला है, यहां तक कि MPSD फोर्स कंपनी के भुगतान का क्लेम तक साला रोहित बरनवाल द्वारा किया जाता है।
“नटवरलाल की गाथा” से टोल माफिया तक
युग क्रांति पहले ही अपने सिलसिलेवार खुलासों में
“27 सौ से 27 करोड़ तक: नटवरलाल की गाथा” के माध्यम से इस नेटवर्क की परतें खोल चुका है।
अब टोल टैक्स बैरियरों पर कब्जा, वैध-अवैध वसूली और सरकारी संसाधनों के खुले दुरुपयोग की यह कहानी उसी काले साम्राज्य का विस्तार प्रतीत होती है।
अब तक की जांच-पड़ताल में सामने आया है कि इस टोल टैक्स रूपी गोरखधंधे में—संजय बरनवाल- मुख्य सूत्रधार, पत्नी और साला रोहित- सक्रिय संचालन में, विभाग के भीतर मुख्य महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी: काले–पीले में, जमीनी स्तर पर- CE और D.M.अमला और इस पूरे जंगलराज का अघोषित संरक्षक अशोक बरनवाल (मामा) को बताया जाता है।
सूत्रों की माने तो अशोक बर्नवाल के नाम की दुहाई और धमकी_ भांजे (संजय..) का प्रचलित हथियार है जो आम बात है। बता दें कि अशोक बर्नवाल मध्य प्रदेश शासन के जंगल विभाग में एडिशनल चीफ सक्रेटरी रैंक के अधिकारी है।
शासन कब जागेगा! यह बड़ा सवाल है कि यह मामला अब सिर्फ टोल टैक्स का नहीं रहा—यह महिला सशक्तिकरण योजनाओं की हत्या, सरकारी सिस्टम की साख पर सवाल,
और प्रदेश में पनपते संगठित टोल माफिया का प्रमाण है।
और सवाल यह भी है कि क्या एमपीआरडीसी और राज्य शासन इस पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा? या फिर प्रदेश की सड़कें यूँ ही कुछ लोगों के काले साम्राज्य की एटीएम मशीन बनी रहेंगी?
परत दर परत खुलासा जारी है.. क्रमशः
