नामों के साथ चर्चाओं का बाजार गर्म..
भोपाल- ग्वालियर 13 जनवरी 2026। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग इन दिनों व्हाट्सएप ग्रुपों और तथाकथित इलेक्ट्रॉनिक गलियारों में चल रही चर्चाओं को लेकर सुर्खियों में है। वायरल संदेशों और चर्चाओं में विभाग के भीतर असामान्य प्रशासनिक निर्णयों, उच्च प्रभारों के वितरण और प्रभावशाली व्यक्तियों की सक्रियता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर प्रसारित चर्चाओं के अनुसार, मंत्री बंगले से आधिकारिक एवं गैर-आधिकारिक रूप से जुड़े बताए जा रहे राहुल सिंह एवं सूरज सिंह के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। वायरल संदेशों में दावा किया जा रहा है कि ये दोनों व्यक्ति ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और रीवा जैसे संभागीय शहरों के होटलों में लगातार सक्रिय रहे हैं, जहां कथित तौर पर विभागीय “एडजस्टमेंट” और प्रभारों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
सूरज–राहुल प्राइवेट लिमिटेड..
इन गलियारों में यह चर्चा भी तेजी से चल रही है कि “सूरज–राहुल प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से मशहूर यह कथित नेटवर्क हाल के दिनों में दो-दो रैंक नीचे के इंजीनियरों को उच्च पदों का प्रभार दिलाने में सफल रहा है। इनके दावों के मुताबिक—
* ग्वालियर में वी.के. झा, कार्यपालन यंत्री को अधीक्षण यंत्री सेतु, मुख्य अभियंता उत्तर परिक्षेत्र सहित कई उच्च प्रभार सौंपे गए।
* पी.आई.यू. जबलपुर से लच्छे, कार्यपालन यंत्री को रीवा मुख्य अभियंता का प्रभार दिए जाने की चर्चा है।
* पटले, कार्यपालन यंत्री जबलपुर को अधीक्षण यंत्री जबलपुर का प्रभार मिलने की बात वायरल संदेशों में कही जा रही है।
* कोमल सिंह उइके, जो राजधानी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता कार्यालय में संलग्न बताए जाते हैं, उन्हें कार्यपालन यंत्री एवं * अधीक्षण यंत्री, गुना—दोनों का प्रभार देने की चर्चा है।
* अनिल आठिया, कार्यपालन यंत्री दमोह को अधीक्षण यंत्री नौगांव एवं अधीक्षण यंत्री सागर का अतिरिक्त कार्यभार मिलने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इतना ही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक गलियारों की चर्चाओं में स्मृति गायकवाड़ का नाम भी सामने आ रहा है। वायरल संदेशों के अनुसार, उन्हें विभिन्न आयोजनों के नाम पर चार इवेंट मैनेजमेंट कार्य देकर लगभग चार करोड़ रुपये के भुगतान की बातें कही जा रही हैं, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
ग्वालियर का सनसनी बाजार और गरम
ग्वालियर मुख्यालय को लेकर चर्चाएं और अधिक तीखी हैं। इलेक्ट्रॉनिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि रेडिसन होटल में सूरज सिंह, राहुल सिंह और वी.के.झा की बैठकों में यह तय किया जाता है कि किन एस.डी.ओ., कार्यपालन यंत्रियों और अधीक्षण यंत्रियों को हटाकर किसे उच्चतम “बिड” के आधार पर प्रभार दिया जाना है।
इन्हीं चर्चाओं के बीच यह भी याद दिलाया जा रहा है कि अष्टाना एस.डी.ओ. प्रकरण में उच्च न्यायालय ग्वालियर पीठ ने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। बावजूद इसके, इन संदेशों में दावा है कि विभागीय कार्यशैली में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा।
हाल ही में एक अन्य वायरल मामले में एक इंजीनियर को मुरैना मुख्यालय पर पदस्थ रहते हुए 800 किलोमीटर दूर डिंडौरी का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का आदेश जारी होने की चर्चा हुई, जिसे बाद में मीडिया में उजागर होने पर निरस्त किए जाने की बातें सामने आईं।
इलेक्ट्रॉनिक गलियारों में चल रही इन चर्चाओं को लेकर यह भी संकेत दिए जा रहे हैं कि आगामी मंत्रिमंडल पुनर्गठन में लोक निर्माण विभाग के भीतर चल रहे कथित विवादों और आरोपों को गंभीरता से लिया जा सकता है। कुछ संदेशों में यह तक कहा जा रहा है कि विभाग में जल्दबाजी में अत्यंत जूनियर इंजीनियरों को उच्च प्रभार देने की होड़ भविष्य की आशंकाओं से जुड़ी हो सकती है।
हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि यह सभी बातें व्हाट्सएप ग्रुपों और इलेक्ट्रॉनिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर आधारित हैं। युग क्रांति इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इतने व्यापक स्तर पर उठ रहे सवालों को शासन एवं जिम्मेदार तंत्र के संज्ञान में लाना पत्रकारिता का दायित्व मानता है। लिहाजा विभाग के मंत्री एवं प्रदेश स्तरीय अधिकारीयों का भी दायित्व बनता है कि व्यापक चर्चाओं एवं सुर्खियां पर संज्ञान ले कि_ये धुंआ – बिना आग के उठ रहा है अथवा वाकई कहीं आग लगी हुई है ?
