Kavbet girişholiganbet güncel girişrestbet girişmarsbahis girişmarsbahismarsbahis güncel girişjojobet girişrestbetrestbet güncel girişholiganbet güncel girişkavbetkavbet girişkavbet güncel girişsohbet odalarıchat.com.trjojobet girişjojobetbahiscasinojojobetjojobetjojobetjojobet girişjojobet girişjojobetjojobet mobil girişkingroyalkingroyal girişholiganbetholiganbet girişjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişcanlı casino sitelericasino sitelerikulisbetkulisbetjojobetjojobet girişjojobetgrandpashabetgrandpashabetgrandpashabetgrandpashabetbetasusjojobetjojobet girişholiganbetholiganbet girişpusulabetpusulabet girişjojobetjojobet girişjojobetkulisbet girişartemisbetartemisbet girişnakitbahisnakitbahis girişjojobetjojobet girişjojobet girişjojobet girişpusulabetpusulabet girişcasinoroyal girişcasinoroyalbahiscasino girişmatbet girişnakitbahisnakitbahis girişjojobet girişjojobetcratosroyalbetcratosroyalbet girişjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişjojobetjojobet girişzirvebetzirvebet girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişlunabetlunabet girişlunabet güncel girişbahiscasinobahiscasino girişbahiscasinobahiscasino girişsonbahissonbahis girişbahiscasinobahiscasino girişkulisbetkulisbet girişvaycasinovaycasino girişnakitbahisnakitbahis girişnakitbahisnakitbahis girişnakitbahisnakitbahis girişjojobetjojobet girişholiganbetholiganbetholiganbetholiganbetjojobetjojobet girişbetsmovebetsmove girişteosbetteosbet girişkavbetbetebetbetebetmilanobetnakitbahisnakitbahis girişimajbetgalabetjojobetholiganbetjojobetimajbetjojobetmarsbahismatbetholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişnakitbahisnakitbahis girişnakitbahisnakitbahis girişnakitbahisnakitbahis girişcasibomcasibom giriştrendbetbetsmovebetsmove girişvaycasinovaycasino girişultrabetultrabet girişjojobetjojobet girişbetsmovebetebetbetebetbetebet girişkavbetkavbetkavbet girişjojobetjojobet girişteosbetteosbet girişjojobetlunabetlunabet girişjojobetholiganbetholiganbetmarsbahiskavbet

“बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले…”

जब शासन की अलख जगी, तब कारपोरेशन का घमंड टूटा..
अजय शर्मा का ईगो ध्वस्त, के.के. संदल एकतरफा रिलीव

भोपाल 15 जनवरी 2026। मध्यप्रदेश शासन के स्पष्ट और लगातार आदेशों को ठेंगा दिखा रहे मप्र पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक अजय शर्मा और उपयंत्री के.के.संदल की जिद, हठधर्मिता और विभागीय आदेशों की अवहेलना पर सरकार ने करारा प्रहार कर दिया है और आखिरकार कॉरपोरेशन की हठधर्मिता का अंत_ आखिरकार बेआबरू विदाई से हुआ।

मामला सिर्फ एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति का नहीं था, बल्कि यह सरकार बनाम कारपोरेशन ईगो की सीधी टक्कर बन चुका था और जब टकराव चरम पर पहुँचा, तब हालात कुछ यूँ बने_“बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले…”

लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश के प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा जारी एकतरफा (One-sided) रिलीव आदेश ने न सिर्फ के.के. संदल को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त मान लिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सरकारी आदेश के सामने न किसी का पद चलता है, न ईगो और न ही कारपोरेशन प्रमुख की मनमानी।

शासन के आदेश, लेकिन कारपोरेशन की मनमानी

लोक निर्माण विभाग और शासन द्वारा-दिनांक 24.10.2025 और 29.12.2025 को जारी स्पष्ट आदेशों में कहा गया कि के.के. संदल की प्रतिनियुक्ति समाप्त और मूल विभाग में तत्काल वापसी मगर इसके बाद भी—क्रमशः 21.11.2025, 01.12.2025 और 29.12.2025 दिनांक में कई स्मरण पत्र और चेतावनियाँ जारी होती रहीं,
लेकिन कारपोरेशन अध्यक्ष अजय शर्मा और के.के. संदल ने आदेशों को या तो दबाया, या अनदेखा किया। यह प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि खुली अवहेलना थी।

जब अपर सचिव ने जगाई अलख

मामला तब निर्णायक मोड़ पर पहुँचा जब लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव संजीव श्रीवास्तव ने दूसरे पत्र के माध्यम से प्रमुख अभियंता केपीएस राणा को उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी याद दिलाई। और यहीं से तस्वीर बदली।
जिस प्रमुख अभियंता पर अब तक सुस्ती, असमंजस और अनिर्णय के आरोप लग रहे थे,वहीं संजीव श्रीवास्तव की ‘अलख’ के बाद केपीएस राणा ने आखिरकार ‘राणा’ बनकर अपने अधिकार का प्रयोग किया।

एकतरफा आदेश: सत्ता का असली चेहरा

13 जनवरी 2026 को जारी पत्र क्रमांक 304/1617आदेश व्या./2013/74 ने कारपोरेशन के सारे भ्रम तोड़ दिए।
इस पत्र में साफ कहा गया—“इस कार्यालय में कार्यग्रहण हेतु आपको तत्काल प्रभाव से एकतरफा कार्यमुक्त माना जाता है।”
यह कोई सामान्य आदेश नहीं है—यह प्रमुख सचिव स्तर से अनुमोदित है जो सीधे यह संदेश दे रहा है कि अब और बहाने नहीं चलेंगे।

अजय शर्मा के चेहरे से उतरा नकाब

इस एक आदेश ने कारपोरेशन के मुखिया अजय शर्मा के प्रशासनिक दावों,कारपोरेशन की कथित स्वायत्तता
और ‘हम जो चाहें करेंगे’ वाले रवैये एवं तथाकथित “चाल, चरित्र और चेहरा” को आईना दिखा दिया।

यह सिर्फ पहला तमाचा नहीं बल्कि नजीर है_ प्रशासनिक गलियारों में साफ चर्चा है कि_आदेशों की अवहेलना, विभागीय जिम्मेदारी और कारपोरेशन की भूमिका पर दूसरा पत्थर भी चल सकता है और ईएमआई के साथ अमन-ओ-चैन से दो पदों पर काबिज अजेय अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को एक पद गंवा कर इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। यह एकतरफा रिलीव आदेश चेतावनी नहीं, नजीर है।

यह कहानी बताती है कि सरकार जब तक चुप रहे, लोग खुद को मालिक समझते हैं लेकिन जिस दिन शासन जागता है,
उसी दिन बड़े-बड़े बेआबरू होकर कूचे से निकल लेते हैं और अच्छे-अच्छे अजय अथवा संदल का ईगो या जिद_धरी की धरी रह जाती है। आखिरकार संविधान, शासन और आदेश ही भारी पड़ते हैं।