सीमाओं पर अडिग प्रहरी, भीतर आत्मनिर्भर शक्ति_ भारतीय सेना को नमन
नई दिल्ली 15 जनवरी 2026। देश आज भारतीय सेना दिवस मना रहा है। 15 जनवरी 1949 को जनरल के.एम. करिअप्पा के पहले भारतीय सेना प्रमुख बनने के साथ ही भारत ने अपनी सैन्य कमान पूरी तरह स्वदेशी हाथों में ली थी। तभी से यह दिन न केवल सैन्य गौरव का प्रतीक है, बल्कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और आत्मसम्मान का उत्सव भी बन चुका है।
आज के बदलते वैश्विक हालात, सीमाओं पर बनी चुनौतियों और आंतरिक सुरक्षा के दबावों के बीच भारतीय सेना का दायित्व और भी बढ़ गया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से लेकर आधुनिक युद्ध तकनीक तक, सेना हर मोर्चे पर देश की रक्षा में मुस्तैदी से खड़ी है।
आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बनती सेना
सेना दिवस केवल परेड या सम्मान तक सीमित नहीं है। यह दिन भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, स्वदेशी हथियार निर्माण और सैन्य आधुनिकीकरण के संकल्प को भी दर्शाता है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा उत्पादन में हो रही प्रगति ने भारत को वैश्विक रक्षा मानचित्र पर मजबूत किया है।
बलिदान और सेवा का स्मरण
इस अवसर पर देश उन वीर जवानों को नमन करता है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। शहीदों का बलिदान और जवानों का अनुशासन ही भारतीय सेना की असली ताकत है।
राष्ट्र का संदेश: सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
सेना दिवस पर दिया जाने वाला राष्ट्रीय संदेश स्पष्ट है-भारत अपनी सीमाओं, नागरिकों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार है। सेना, सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास ही देश की सबसे बड़ी ढाल है।
