युग क्रांति की खबर फिर साबित हुई नजीर, अजय शर्मा से छिना एमडी पद..
भोपाल 29 जनवरी 2026। मप्र पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में लंबे समय से अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक की दोहरी भूमिका निभा रहे अजय शर्मा को आखिरकार एक पद गंवाना पड़ा। लोक निर्माण विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए उपयंत्री को नियमों से ऊपर रखकर संरक्षण देने और शासनादेशों की अवहेलना के मामले में लगातार युगक्रांति की सुर्खियों में रहे अजय शर्मा से प्रबंध संचालक (एमडी) का पद छीन लिया गया है। अब वे केवल अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे, जबकि अनंत कुमार सिंह को पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन का नया प्रबंध संचालक नियुक्त किया गया है।
गौरतलब है कि युग क्रांति ने अपने पूर्व प्रकाशित समाचार में वल्लभ भवन की विषयक मंत्रणा के आधार पर स्पष्ट चेतावनी दी थी_“यह सिर्फ पहला तमाचा नहीं, बल्कि नजीर है। आदेशों की अवहेलना और कारपोरेशन की भूमिका पर दूसरा पत्थर भी चल सकता है।”
युगक्रांति ने पिछले समाचार में चेताते हुए साफ़ शब्दों में
लिखा था कि “सब इंजीनियर संदल को एकतरफा रिलीव करना महज एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि यह स्पष्ट संकेत है कि अब न तो नियमों से खिलवाड़ चलेगा और न ही पदों का दुरुपयोग।“जब तक सरकार चुप रहती है, लोग खुद को मालिक समझने लगते हैं, लेकिन जिस दिन शासन जागता है, उसी दिन बड़े-बड़े बेआबरू होकर कूचे से निकलते हैं।”और आज वही हुआ। शासन की चुप्पी टूटते ही अजेय तंत्र ढह गया।
अनंत कुमार सिंह से जगी ‘स्वर्णिम उपक्रम’ की उम्मीद
कारपोरेशन के विभागीय गलियारों और अन्य हलकों में यह चर्चा तेज है कि बरसों बाद पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन को एक सक्षम, सख्त और तकनीकी समझ रखने वाला एमडी मिला है। जनवरी 2019 के बाद निगम पर जो ग्रहण सा लगा था, अनंत कुमार सिंह की पदस्थापना को उसके अंत के रूप में देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन को मप्र पुलिस आवास एवं अधोसंरचना विकास निगम के रूप में पहचान दिलाने का श्रेय पूर्व एमडी संजय राणा को जाता है। उनके कार्यकाल में गुणवत्ता की हालत यह थी कि—
“किसी भी निर्माण में छत से प्लास्टर झड़ने मात्र पर जिम्मेदार अधिकारी की खटिया खड़ी हो जाती थी।”
अनंत कुमार सिंह संक्षिप्त में
अनंत कुमार सिंह 1994 बैच के आईपीएस है जो भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। वे वर्तमान में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) हैं और उनके कार्यकाल को 23 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया था। इससे पहले वे सीआईएसएफ (CISF) में डीआईजी और आईजी के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। साथ ही उन्हें वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है।
वे आईआईटी (आईएसएम) धनबाद से खनन इंजीनियरिंग स्नातक हैं और मध्य प्रदेश में जिला पुलिस अधीक्षक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
यानी अनंत कुमार सिंह सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता और अनुशासन का सशक्त संयोजन हैं—जिनसे निगम को फिर से स्वर्णिम उपक्रम बनाने की उम्मीद जगी है।
अजय शर्मा का एमडी पद से हटना केवल व्यक्ति विशेष की हार नहीं, बल्कि व्यवस्था की जीत और युगक्रांति की पत्रकारिता की साख है। यह फैसला आने वाले समय में उन सभी के लिए चेतावनी है, जो पद को सत्ता और संरक्षण का औजार समझते हैं।
