भोपाल 5 फरवरी 2026। वंदे भारत स्लीपर जैसी नई रोलिंग स्टॉक के विकास की प्रक्रिया में एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जिसमें सुरक्षित, विश्वसनीय और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी नवाचार, रणनीतिक योजना और उत्पादन का संयोजन शामिल है। इसमें प्रोटोटाइप का विकास, व्यापक परीक्षण और प्रयोग के बाद श्रृंखला उत्पादन शामिल है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन निर्माण कार्यक्रम को बीईएमएल और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई और प्रौद्योगिकी भागीदारों द्वारा प्रोटोटाइप विकास, प्रयोग और श्रृंखला उत्पादन के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से निष्पादित किया जा रहा है।
इन ट्रेनसेटों को नियमित यात्री सेवा में शामिल करना मांग और परिचालन तत्परता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के कुल 260 रेक के निर्माण की योजना बनाई गई है।
यात्रियों के यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने और सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा के मामले में नए मानक स्थापित करने के लिए, इन ट्रेनसेटों में आधुनिक कोच लगाए गए हैं जिनमें उन्नत सुरक्षा सुविधाएँ और यात्री सुविधाएँ जैसे:
* झटके रहित अर्ध-स्थायी कपलर और एंटी-क्लाइम्बर
* कवच से सुसज्जित।
* 180/160 किमी प्रति घंटे की डिज़ाइन/ऑपरेटिंग गति के साथ उच्च त्वरण।
* EN मानकों के अनुरूप कार बॉडी का क्रैशप्रूफ डिज़ाइन।
* अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन के लिए प्रत्येक कोच के अंत में फायर बैरियर दरवाजे।
* बेहतर अग्नि सुरक्षा – विद्युत कैबिनेट और शौचालयों में एरोसोल आधारित अग्नि पहचान और शमन प्रणाली।
* ऊर्जा दक्षता के लिए पुनर्योजी ब्रेकिंग प्रणाली।
* यात्री क्षेत्र के भीतर स्वच्छता मानकों को बेहतर बनाने के लिए वातानुकूलित हवा से 99% हानिकारक बैक्टीरिया को निष्क्रिय करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित यूवी-सी लैंप आधारित कीटाणुशोधन प्रणाली से सुसज्जित एयर कंडीशनिंग इकाइयाँ।
* केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित प्लग दरवाजे और पूरी तरह से सीलबंद चौड़े गलियारे।
* सभी कोचों में सीसीटीवी।
* आपातकालीन स्थिति में यात्री और ट्रेन मैनेजर/लोको पायलट के बीच संचार के लिए इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट।
* दिव्यांगजन यात्रियों के लिए, दोनों छोर पर स्थित ड्राइविंग कोचों में विशेष शौचालय।
* एयर कंडीशनिंग, सैलून लाइटिंग आदि जैसी यात्री सुविधाओं की बेहतर निगरानी के लिए केंद्रीकृत कोच मॉनिटरिंग सिस्टम।
* ऊपरी बर्थ पर चढ़ने में आसानी के लिए एर्गोनॉमिकली डिज़ाइन की गई सीढ़ी।
यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
