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संस्कारधानी जबलपुर में सियासी उबाल

 ‘दिलप्रीत कनेक्शन’ पर बवाल, मंत्री के तेवर और सिस्टम पर सवाल

जबलपुर/भोपाल। संस्कारधानी जबलपुर इन दिनों एक ऐसे विवाद से उबल रही है, जिसने सत्ता और सिस्टम दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। लोक निर्माण विभाग से जुड़े इस घटनाक्रम में मंत्री राकेश सिंह के तेवर चर्चा में हैं, वहीं एक ईमानदार छवि वाले आईएएस अधिकारी अरविंद शाह के साथ कथित दुर्व्यवहार ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, जबलपुर स्मार्ट सिटी में पदस्थ अरविंद शाह द्वारा लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारियों और संदिग्ध भुगतान पर सख्ती दिखाई गई। इसी क्रम में दिलप्रीत भल्ला का वेतन रोके जाने की बात सामने आई, जिसके बाद विवाद अचानक तूल पकड़ गया। बताया जा रहा है कि यह निर्णय कुछ प्रभावशाली हलकों को नागवार गुजरा और मामला सीधे मंत्री स्तर तक पहुंच गया।

‘दिलप्रीत कनेक्शन’ से गरमाई सियासत

अंदरखाने चर्चाएं इस बात को लेकर भी तेज हैं कि दिलप्रीत भल्ला के इर्द-गिर्द बना नेटवर्क इस विवाद का केंद्र बन गया है। राहुल सिंह (ओएसडी) और सूरज सिंह कुशवाह के नाम भी लगातार चर्चाओं में हैं। सूत्रों के हवाले से यह कहा जा रहा है कि निजी समीकरण और गहरी नजदीकियां इस पूरे प्रकरण को हवा दे रही हैं, जिसमें होटल एवं रिसोर्ट तक की गतिविधियों का जिक्र तक हुआ है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

मंत्री जी की धमकीविवाद का सबसे संवेदनशील पहलू तब सामने आया जब मंत्री राकेश सिंह द्वारा कथित तौर पर अरविंद शाह को तलब कर कड़ी नाराजगी जताते हुए धमकाया, बोले -एक इशारे पर सिख कौम तुम्हें मार देगी। जो साफ़ तौर पर मंत्री जी की दिलप्रीत के प्रति प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष गहरी रुचि को दर्शाता है।प्रशासनिक गलियारों में इसे लेकर असहजता है कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार शासन व्यवस्था की मर्यादाओं पर सवाल खड़ा करता है।

सुशासन पर उठे सवाल, विभागीय व्यवस्था भी घेरे में

इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार के “गुड गवर्नेंस” मॉडल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि मामला दिल्ली तक पहुंच चुका है और शीर्ष स्तर पर इसकी समीक्षा की जा रही है। आने वाले समय में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर कुछ सख्त फैसले संभव माने जा रहे हैं।
इसी बीच लोक निर्माण विभाग में पदस्थापनाओं और प्रभार वितरण को लेकर भी नए आरोप सामने आए हैं। वरिष्ठता को दरकिनार कर जूनियर अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की चर्चाएं हैं। वर्ष 2025 से शुरू हुई व्यवस्थाओं को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं, जिससे विभागीय पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

ताजा अपडेट में भोपाल संभाग से जुड़ा एक और मामला सामने आया है, जहां पूनम तुर्कर को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने और उसके पीछे कथित समीकरणों की चर्चा है। ठेकेदारी, भुगतान और समय-वृद्धि से जुड़े मामलों में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं, हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इसी तरह की कथित गतिविधियों में भोपाल मुख्य अभियंता संजय मस्के का नम भी सुर्खियों मे बताया जा रहा है।

पूरे घटनाक्रम में स्मृति गायकवाड़ और उर्वशी टेंभरे के नाम भी चर्चाओं में हैं, जिनका जिक्र कथित नेटवर्क के संदर्भ में किया जा रहा है। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि संस्कारधानी में यह मामला “बासी कढ़ी में उबाल” की तरह उफान पर है।

सवाल सिर्फ एक विवाद का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है जो सुशासन का दावा करता है। सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन मंत्री राकेश सिंह की छवि को लगातार तार-तार करने वाले राहुल और सूरज पर मंत्री द्वारा अंकुश क्यों नहीं लग रहा? फिलहाल इस प्रकरण ने सत्ता, संबंध और सिस्टम के रिश्तों पर गहरी बहस जरूर छेड़ दी है।