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“ग्वालियर में प्रशासन की दोहरी नीति? अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई, मगर सरकारी जमीन पर कब्जे को खुली छूट !”

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महापौर के निर्देश, जनसुनवाई की शिकायतें और आधिकारिक पत्र—सब बेअसर, 3 साल से नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई

ग्वालियर 3 मई 2026। ग्वालियर में प्रशासन की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर कलेक्टर द्वारा अवैध कॉलोनियों / प्लोटिंग के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय जमीनों और भवन परिसर पर हो रहे खुले अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है।

मौजूदा स्थिति, उपलब्ध दस्तावेज़ और पत्र इस बात की पुष्टि करते हैं कि शहर के आदित्यपुरम, आस्था नगर और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर वर्षों से कब्जा जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी औपचारिकताएं ही दिखाई देती हैं।

महापौर के निर्देश भी बेअसर, कार्रवाई शून्य

स्थानीय लोगों के शिकायत पत्रपत्रों के अनुसार, ग्वालियर की महापौर द्वारा कलेक्टर को स्पष्ट रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। संदर्भ में 25 अगस्त 2023 का नगर निगम का पत्र भी शामिल है, जिसमें वार्ड क्रमांक 18 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों—आदित्यपुरम, गोकुल विहार और आस्था नगर—की शासकीय भूमि (सर्वे नंबर 207 से 226) ‘बिजली घर और आंगनबाड़ी केंद्रकी जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कराई गई थी।

इसके बावजूद, अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।

जनसुनवाई में भी गुहार, फिर भी 3 साल से सन्नाटा

स्थानीय निवासियों ने हार न मानते हुए कलेक्टर जनसुनवाई में भी शिकायत दर्ज कराई। दस्तावेज़ों में 3 जून 2025 की जनसुनवाई की मुहर स्पष्ट दिखाई देती है।

शिकायत में बताया गया कि भूमि सर्वे क्रमांक 211/2, 208, 168 और 526 सहित कई सरकारी जमीनों पर दबंगों और

आंगनबाड़ी केंद्र महाराजपुरा आदित्यपुरम

तथाकथित संगठनों के नाम पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इतना ही नहीं, आरोप है कि पूर्व सैनिक कल्याण संगठन के नाम का दुरुपयोग करते हुए कुछ लोगों ने न सिर्फ कब्जा किया, बल्कि आंगनवाड़ी परिसर में बने शासकीय बाथरूम और शौचालय तक तोड़कर अवैध निर्माण खड़ा कर दिया।

अतिक्रमण से आगे_अपराध का अड्डा बनता इलाका

मामला सिर्फ जमीन कब्जे तक सीमित नहीं है बल्कि “प्राण एवं दैहिक सुरक्षा” का है। स्थानीय लोगों के अनुसार, आदित्यपुरम स्थित बिजली घर के पास का यह क्षेत्र अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है।

यहां नशे का कारोबार, संदिग्ध गतिविधियां और महिलाओं के साथ अभद्रता जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। स्थानी लोगों ने अनेकों बार प्रशासन से शिकायत की, इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी हालात को और गंभीर बना रही है।

कलेक्टर की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब:_
महापौर द्वारा कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए,
नगर निगम के आधिकारिक पत्र भेजे गए,
और दो-दो बार जनसुनवाई में शिकायत की गई,
तो फिर कलेक्टर द्वारा अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?
क्या शासकीय जमीन पर कब्जा करने वालों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? या फिर प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है ताकि जमीनी अमला की अवैध कमाई का जरिया बना रहे?

ग्वालियर में यह मामला सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता का बन चुका है। जब एक तरफ अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चल रहा है और दूसरी तरफ सरकारी जमीन पर कब्जे को अनदेखा किया जा रहा है, तो यह दोहरी नीति साफ नजर आती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर कब जागता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा का दबा रह जाएगा।