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विभाग जाएगा, वसूली नहीं ! ‘क्लोजिंग सेल’ मोड में मंत्री जी का तंत्र

ट्रांसफर उद्योग का आखिरी धंधा तेज

भोपाल। सत्ता के गलियारों में एक कहावत तेजी से तैर रही है_“विभाग बदल सकता है, लेकिन वसूली का टारगेट नहीं!” मध्य प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की आहट के बीच एक ‘वजनदार’ विभाग के मंत्री जी और उनका कथित नेटवर्क इन दिनों फुल एक्शन मोड में है।

बताया जा रहा है कि पूरे सिस्टम को अब “क्लोजिंग सेल” में डाल दिया गया है—जहां फाइलों से ज्यादा तेजी से पुराने ‘हिसाब-किताब’ निपटाए जा रहे हैं।

‘सीजन सेल’ में बदल गया सिस्टम

राजधानी में बोर्ड ऑफिस के पास स्थित वह चर्चित आलीशान ठिकाना, जहां कभी खुलेआम ‘रेट लिस्ट’ की चर्चा होती थी, अब अचानक बंद हो चुका है।

सूत्र बताते हैं कि पूरा नेटवर्क अब “वर्क फ्रॉम हिडन लोकेशन” मोड में शिफ्ट हो गया है_मोबाइल नंबर सीमित, लोकेशन गायब और WhatsApp पर “Last Seen Long Time Ago”।

रिटायर्ड चेहरों के सहारे ‘एक्टिव ऑपरेशन’

जानकारी के मुताबिक, मंडला से रिटायर एक विवादित सब-इंजीनियर की अगुआई में यह पूरा नेटवर्क फिर सक्रिय है। हैरानी की बात यह कि इसमें विभाग के कुछ प्रभावशाली वर्तमान अधिकारी भी परोक्ष रूप से जुड़े बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इंजीनियरों और ठेकेदारों को लगातार कॉल किए जा रहे हैं—“भैया, पुराना हिसाब क्लियर कर लो… मंत्री जी का विभाग बदल गया तो नए लोग कोई रियायत नहीं देंगे… अभी मौका है, बाद में नुकसान होगा।”

‘ऑफर वैलिड टिल कैबिनेट फेरबदल’: बताया जा रहा है कि बकायादारों को बाकायदा मैसेज भेजे जा रहे हैं_Final settlement… Offer valid till new cabinet list

इतना ही नहीं, कुछ मामलों में तो “डिस्काउंट ऑफर” तक दिए जाने की चर्चा है, ताकि लंबित रकम जल्द से जल्द वसूली जा सके।

ढाई साल का ‘स्टार्टअप’, अब फाइनल कलेक्शन

पिछले ढाई साल में विभाग को जिस तरह से चलाया गया, उसे लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अब जब कुर्सी पर खतरा मंडराने की आशंका है, तो पूरा तंत्र “फाइनल कलेक्शन ड्राइव” में जुट गया है।

मंत्रालय के गलियारों में यह चर्चा आम है कि—“इतनी तेजी से फाइलें कभी नहीं चलीं, जितनी तेजी से अभी ‘हिसाब’ निपट रहे हैं।”

वल्लभ भवन में फुसफुसाहट

अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस गतिविधि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। चाय की टेबल पर सवाल उठ रहे है_“ये सरकारी काम है या विदाई से पहले का कलेक्शन अभियान?”

राजनीति में कुर्सी स्थायी नहीं होती, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिस्टम में जड़ें जमा चुका यह ‘ट्रांसफर उद्योग’ भी कभी बदलेगा? फिलहाल इस पूरे तंत्र की मंत्री जी के लिए दुआ है कि विभाग बना रहे… और नेटवर्क के लिए प्रार्थना—“बस कुछ दिन और मिल जाएं, क्लोजिंग पूरी हो जाए।”

(नोट: यह रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं और चर्चाओं पर आधारित है। आधिकारिक पुष्टि/पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)