नन्हीं उम्र में रचनात्मकता की मिसाल बनीं आर्यमा मिश्रा, कविता संग्रह के माध्यम से भावनाओं और कल्पनाओं को दिया शब्दों का स्वरूप
ग्वालियर/भोपाल 25 जून 2026। आज के दौर में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में व्यस्त हैं, वहीं बालिका लेखिका आर्यमा मिश्रा ने साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी काव्य पुस्तक ‘स्वप्न और स्पर्श के बीच’ पाठकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह कविता संग्रह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक संवेदनशील बाल मन की कल्पनाओं, अनुभूतियों और भावनाओं का सजीव दस्तावेज है। पुस्तक का शीर्षक ही पाठकों को उस संसार में ले जाता है जहां सपनों की उड़ान और वास्तविक जीवन के अनुभव एक-दूसरे से संवाद करते दिखाई देते हैं।
पुस्तक के आकर्षक आवरण पर अंकित पर्वत, हरियाली और शांत नदी का दृश्य इसके भीतर समाहित भावनात्मक और प्रकृति-प्रेम से ओतप्रोत काव्य संसार की झलक देता है। आर्यमा की कविताएं जीवन, प्रकृति, संवेदनाओं और मानवीय रिश्तों के विभिन्न पहलुओं को सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में अभिव्यक्त करती हैं।
साहित्य प्रेमियों का मानना है कि इतनी कम उम्र में पुस्तक का प्रकाशन आर्यमा मिश्रा की प्रतिभा, मेहनत और साहित्य के प्रति समर्पण का प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और शिक्षकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन बच्चों के लिए भी प्रेरणा है जो लेखन और साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है और आर्यमा मिश्रा जैसी प्रतिभाएं यह साबित करती हैं कि उम्र कभी भी प्रतिभा की सीमा नहीं बन सकती।
आर्यमा मिश्रा की यह पुस्तक संदेश देती है कि सपनों को शब्दों में ढालने का साहस हो तो छोटी उम्र में भी बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।
