गुणवत्ता, अनियमित भुगतान, रॉयल्टी, DLP और परियोजना प्रबंधन पर वर्षों से उठती रही ऑडिट आपत्तियां, अब जवाबदेही की बारी
भोपाल। मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) एक बार फिर गंभीर सवालों के केंद्र में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा पिछले वर्षों में विभिन्न ऑडिट रिपोर्टों और ऑडिट पैरों के माध्यम से सड़क निर्माण, वित्तीय प्रबंधन और परियोजना क्रियान्वयन में जिन कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया था, वे आज भी जवाब मांग रही हैं। सवाल यह है कि जिन अनियमितताओं की ओर देश की सर्वोच्च ऑडिट संस्था ने संकेत किया था, उनका समाधान आखिर कितना हुआ?
यद्यपि वर्ष 2025-26 के लिए MPRRDA पर कोई नई CAG ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन पूर्व वर्षों में दर्ज ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण, रिकवरी और जिम्मेदारी तय होने की स्थिति आज भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह मामला फिर चर्चा में है।
ऑडिट में किन-किन मुद्दों पर उठे सवाल
CAG की विभिन्न ऑडिट टिप्पणियों में जिन बिंदुओं पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं, उनमें शामिल हैं—
- पर्याप्त सर्वेक्षण और मिट्टी परीक्षण के बिना सड़कों का डिजाइन तैयार करना।
- ट्रांसेक्ट वॉक एवं व्यवहार्यता अध्ययन जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं करना।
- निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों और IRC गाइडलाइन की अनदेखी।
- अनुबंध से बाहर के कार्यों अथवा संदिग्ध मदों में भुगतान।
- खनिज रॉयल्टी की वसूली एवं सरकारी खाते में जमा करने में अनियमितता।
- परियोजनाओं में अत्यधिक देरी के कारण लागत बढ़ना।
- डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (DLP) के दौरान ठेकेदारों से मरम्मत नहीं कराना।
- महंगे निर्माण मदों के चयन से परियोजना लागत बढ़ना।
- गुणवत्ता नियंत्रण एवं निगरानी व्यवस्था पर सवाल।
ऑडिट में ग्वालियर और भिंड क्षेत्र में सड़क गुणवत्ता, जल निकासी, सब-ग्रेड निर्माण, ओवर पेमेंट, DLP के पालन तथा परियोजना प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। कई मामलों में सड़कों के समय से पहले क्षतिग्रस्त होने और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
वर्तमान के सबसे बड़े सवाल ?
यदि CAG वर्षों पहले इन कमियों की ओर संकेत कर चुका था, तो—
- कितनी ऑडिट आपत्तियों का अंतिम निस्तारण हुआ?
- कितने मामलों में सरकारी धन की रिकवरी हुई?
- कितने अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई?
- कितने ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई या ब्लैकलिस्टिंग हुई?
- कितनी सड़कें DLP के तहत ठेकेदारों से दोबारा बनवाई गईं?
- कितने मामलों में विभाग ने Action Taken Note (ATN) समय पर प्रस्तुत किए?
- लोक लेखा समिति (PAC) में लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है?
आम जनता का कहना है कि यदि सरकार पारदर्शिता का दावा करती है तो यह जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए—
* वर्तमान में लंबित ऑडिट पैरों की संख्या। * प्रत्येक ऑडिट आपत्ति पर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई। *कुल रिकवरी की राशि और उसकी वर्तमान स्थिति। *दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर हुई कार्रवाई। *गुणवत्ता सुधार के लिए लागू नई व्यवस्था।
ग्रामीण सड़कें केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि गांवों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा हैं। यदि इन पर खर्च हुए सार्वजनिक धन के उपयोग पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, तो जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होना भी उतना ही आवश्यक है। अन्यथा एमपीआरडीसी एवं अन्य की तरह युग क्रांति की आवाज के रूप में सड़क का मुद्दा सदन तक गूंजेगा।
(नोट : यह खबर कैग की पिछली रिपोर्ट की टिप्पणी पर आधारित है, यदि विभाग अपना पक्ष या अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
