₹44,238 करोड़ GST संग्रह का दावा, फिर भी बजट लक्ष्य से ₹6,580 करोड़ पीछे! CAG ने खोली निगरानी की पोल
मध्यप्रदेश में GST का चमकता आंकड़ा और अंदर की कमजोर व्यवस्था
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार भले ही GST संग्रह में हजारों करोड़ रुपए का आंकड़ा सामने रखकर राजस्व बढ़ने की तस्वीर पेश कर रही हो, लेकिन बजट के आंकड़े और भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट एक दूसरी तस्वीर सामने रखते हैं। वर्ष 2025-26 में राज्य GST के लिए ₹42,140 करोड़ का बजट लक्ष्य रखा गया था, लेकिन संशोधित अनुमान में यह घटकर ₹35,560 करोड़ रह गया। यानी बजट लक्ष्य की तुलना में करीब ₹6,580 करोड़ की कमी रही। इसके बावजूद वर्ष 2026-27 के लिए राज्य ने GST से ₹42,311 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है।
दिलचस्प बात यह है कि एक सरकारी प्रस्तुति में 2025-26 के दौरान मध्यप्रदेश का GST संग्रह ₹44,238 करोड़ बताया गया है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹44,238 करोड़ और बजट में दर्ज ₹35,560 करोड़ संभवतः GST की अलग-अलग लेखा-परिभाषाओं/मदों से संबंधित आंकड़े हैं। इसलिए दोनों को सीधे जोड़कर या तुलना करके किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। लेकिन यही अंतर यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि राज्य के वास्तविक SGST राजस्व की तस्वीर आखिर कितनी साफ और पारदर्शी है?
CAG की जांच में 6,020 करोड़ रुपए के बड़े डेटा विचलन
GST व्यवस्था को लेकर CAG की रिपोर्ट इससे भी गंभीर सवाल उठाती है। मध्यप्रदेश के Commercial Tax Department की GST व्यवस्था की जांच में CAG ने राज्यभर के डेटा का विश्लेषण करते हुए 15 अलग-अलग जोखिम मानकों पर बड़ी संख्या में विसंगतियां चिन्हित की थीं।
CAG की रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 के डेटा विश्लेषण में 395 उच्च जोखिम वाली विसंगतियां चिन्हित हुईं, जिनसे संबंधित मामलों का कुल वित्तीय मूल्य लगभग ₹6,020.65 करोड़ था। इनमें ITC, रिटर्न, टर्नओवर और कर देनदारी से संबंधित विभिन्न प्रकार की असंगतियां शामिल थीं। इसके बाद 368 करदाताओं के 395 मामलों का चयन कर विभाग की कार्रवाई की जांच की गई।
CAG ने एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु में बताया कि 119 मामलों में टर्नओवर सहित विभिन्न GST रिटर्न संबंधी mismatch सामने आए, जिनका मूल्य ₹2,700.36 करोड़ था। यह आंकड़ा उस नमूने में सामने आई विसंगतियों की गंभीरता को दर्शाता है।
इतना ही नहीं, CAG की जांच में विभागीय स्तर पर non-filers के खिलाफ कार्रवाई का अभाव, रिटर्न की scrutiny में धीमी गति, GST audit में देरी अथवा internal audit शुरू नहीं किया जाना, DGARM की risk reports पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होना तथा GST registration cancellation की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होना जैसी कमियां भी सामने आईं।
सवाल सिर्फ GST चोरी का नहीं, सरकारी निगरानी का भी
GST व्यवस्था में करदाता द्वारा गलत रिटर्न दाखिल करना एक समस्या है, लेकिन उससे बड़ी समस्या तब पैदा होती है जब विभाग के पास उपलब्ध डिजिटल डेटा संभावित गड़बड़ी की ओर संकेत करे और उसके बावजूद समय पर कार्रवाई न हो। CAG ने अपने ऑडिट में इसी पहलू को रेखांकित किया। ऑडिट ने GSTR-9C, GSTR-1, GSTR-3B, ITC और अन्य उपलब्ध डिजिटल सूचनाओं का विश्लेषण कर जोखिम वाले मामलों की पहचान की। यानी विभाग के पास ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए डेटा और तकनीकी साधन उपलब्ध हैं, लेकिन CAG को उनकी निगरानी और follow-up में कमियां मिलीं।
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के स्वयं के कर राजस्व में GST सबसे बड़ा स्रोत है। 2026-27 में राज्य के अपने कर राजस्व में SGST की हिस्सेदारी लगभग 36 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सरकार ने 2025-26 के संशोधित अनुमान ₹35,560 करोड़ के मुकाबले 2026-27 में ₹42,311 करोड़ का लक्ष्य रखा है—यानी करीब 19 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य।
₹42,311 करोड़ का लक्ष्य, लेकिन क्या निगरानी व्यवस्था भी तैयार है?
सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए GST संग्रह में बड़ी छलांग का लक्ष्य तो रखा है, लेकिन सवाल यह है कि राजस्व बढ़ाने के साथ GST compliance की निगरानी कितनी मजबूत की गई है?
CAG की रिपोर्ट में सामने आई विसंगतियां पुरानी अवधि से संबंधित हैं, इसलिए उन्हें वर्तमान वर्ष की चोरी या नुकसान बताना उचित नहीं होगा। लेकिन वे यह जरूर बताती हैं कि GST लागू होने के शुरुआती वर्षों में विभागीय निगरानी के स्तर पर गंभीर चुनौतियां मौजूद थीं।
अब जब GST राज्य के स्वयं के कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है और सरकार ने 2026-27 में ₹42,311 करोड़ का लक्ष्य रखा है, तब पुराने audit observations के आधार पर यह देखना जरूरी हो जाता है कि क्या उन कमियों को पूरी तरह दूर किया गया है?
सरकार से उठते हैं पांच बड़े सवाल
- 2025-26 के GST संग्रह के लिए ₹44,238 करोड़ और SGST के संशोधित अनुमान ₹35,560 करोड़ के बीच अंतर किस वजह से है?
- CAG द्वारा चिन्हित GST संबंधी पुरानी विसंगतियों में से कितने मामलों में कर की मांग तय हुई?
- कितनी राशि वास्तव में वसूल की गई?
- DGARM की risk reports के आधार पर अब कितनी कार्रवाई हो रही है?
- 2026-27 के ₹42,311 करोड़ के GST लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग ने compliance और tax leakage रोकने की क्या ठोस व्यवस्था की है?
राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि जो GST वास्तव में देय है, वह पूरा राज्य के खजाने तक पहुंचे।
मध्यप्रदेश के लिए चुनौती अब केवल ₹42 हजार करोड़ से अधिक GST जुटाने की नहीं है। असली चुनौती है—GST के हर संभावित रिसाव को रोकना और यह साबित करना कि डिजिटल डेटा से मिलने वाले हर red flag पर विभाग समय रहते कार्रवाई कर रहा है।
