मध्यप्रदेश की सहकारी विपणन समितियों के पुनरुत्थान और व्यवसाय विस्तार पर व्यापक मंथन के रखे सुझाव
किसानों को अधिक सुविधाएं एवं व्यवसाय उपलब्ध कराने पर जोर
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के अंतर्गत प्रदेश की सहकारी विपणन समितियों की महत्वपूर्ण बैठक भोपाल में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश की लगभग 248 से अधिक विपणन सहकारी समितियों के अध्यक्षों, प्रबंधकों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य विपणन सहकारी समितियों की वर्तमान आर्थिक एवं व्यवसायिक स्थिति की समीक्षा करते हुए उनके पुनरुत्थान, व्यवसाय विस्तार, वित्तीय सुदृढ़ीकरण तथा किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर व्यापक विचार-विमर्श करना रहा।
बैठक में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के मुख्य महाप्रबंधक एवं एमडी श्री अभिजीत अग्रवाल तथा सचिव श्री महेंद्र दीक्षित सहित संबंधित अधिकारियों एवं प्रदेशभर से आए सहकारी प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में विपणन संस्थाओं के विभिन्न प्रतिनिधियों और सहकारी नेताओं ने विपणन संस्थाओं एवं विपणन संघ के पुनरुत्थान एवं व्यवसायिक गतिविधियों के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। वहीं संघ के अन्य प्रतिनिधियों श्री बनवारी लाल शुक्ला, श्री मुमताज खान एवं जनार्दन शुक्ला सहित कुंवर अरविंद सिंह तोमर ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए श्री अरविंद सिंह तोमर ने विपणन संस्थाओं को नवाचार के तहत विभिन्न नवीन व्यवसाय एवं शासन की योजनाओं के अनुरूप कार्य करने एवं विपणन संघ भोपाल को भी अपने कार्य में बदलाव कर लाभ के कार्यों पर ध्यान देने हेतु कहा इस अवसर पर विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव एवं सुझाव रखे।
विपणन समितियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विपणन सहकारी समितियों को केवल परंपरागत उपार्जन एवं कृषि आदान वितरण तक सीमित न रखते हुए उनके लिए नए एवं स्थायी आय के स्रोत विकसित किए जाएं। समितियों को आधुनिक व्यवसायिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत एवं आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता बताई गई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि समितियों के पास उपलब्ध भूमि, भवन, गोदाम एवं अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए वेयरहाउस, कृषि उपज भंडारण, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, पैकिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स तथा किसान सुविधा केंद्र जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
बैठक में किसानों एवं सहकारी समितियों को खेती-किसानी से संबंधित गतिविधियों के लिए अधिक से अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने तथा समितियों के व्यवसाय को बढ़ाने पर जोर दिया गया। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि विपणन समितियों को उनकी वास्तविक क्षमता एवं स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त व्यवसाय उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे उनकी आय बढ़े और वे अपने खर्चों को स्वयं वहन करते हुए आत्मनिर्भर बन सकें।
पेट्रोल पंप और उर्वरक व्यवसाय में अवसर
बैठक में विपणन सहकारी समितियों को पेट्रोल पंप संचालन के अवसर उपलब्ध कराने तथा पात्र समितियों को उर्वरक व्यवसाय/उपार्जन व्यवस्था में अधिक प्रभावी रूप से सहभागी बनाने का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधियों का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों का मजबूत नेटवर्क उपलब्ध है। इस नेटवर्क का उपयोग किसानों को कृषि आदान एवं अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ समितियों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने में किया जा सकता है।
बैठक में विपणन समितियों को मिलने वाले कमीशन की समीक्षा एवं वृद्धि तथा किसानों को उनकी कृषि उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने पर भी विशेष चर्चा हुई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समितियों को पर्याप्त व्यवसाय, उचित कमीशन एवं आवश्यक वित्तीय सहयोग मिलता है तो वे किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ स्वयं भी आर्थिक रूप से मजबूत हो सकती हैं।
डिजिटल एवं आधुनिक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता
बैठक में विपणन समितियों के कंप्यूटरीकरण, ऑनलाइन लेखा प्रणाली, डिजिटल स्टॉक प्रबंधन, गोदाम प्रबंधन एवं पारदर्शी व्यवसायिक संचालन को समय की आवश्यकता बताया गया। पैक्स कंप्यूटरीकरण की तर्ज पर विपणन समितियों को भी आधुनिक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया। साथ ही, केंद्र एवं राज्य शासन की उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेकर समितियों की अधोसंरचना एवं व्यवसायिक क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।
बैठक में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि प्रदेश की कमजोर विपणन सहकारी समितियों का संस्था-वार सर्वे कराया जाए, जिसमें उनकी संपत्ति, देनदारियां, उपलब्ध अधोसंरचना, कर्मचारी, व्यवसायिक क्षमता एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संभावनाओं का आकलन किया जाए। इसके आधार पर प्रत्येक संस्था के लिए चरणबद्ध पुनरुत्थान एवं व्यवसाय विस्तार की कार्ययोजना तैयार की जा सकती है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रदेश की विपणन सहकारी संस्थाएं किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत संस्थाएं हैं। इसलिए उन्हें बंद करने के बजाय आधुनिक, बहुउद्देशीय, डिजिटल एवं आत्मनिर्भर सहकारी संस्थाओं के रूप में विकसित करना दीर्घकालीन समाधान होगा।
बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि बैठक में उठाए गए सुझावों को शासन एवं विपणन संघ स्तर पर गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ठोस नीति एवं कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे प्रदेश की विपणन सहकारी समितियों के साथ-साथ लाखों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
प्रमुख रूप से उपस्थित
बैठक में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के एमडी एवं मुख्य महाप्रबंधक श्री अभिजीत अग्रवाल, सचिव श्री महेंद्र दीक्षित, विपणन/उर्वरक विभाग से श्री खेड़कर, मार्केटिंग सोसायटी पोहरी के अध्यक्ष कुंवर अरविंद सिंह तोमर, कैलारस से श्री बनवारी लाल शुक्ला, सेवढ़ा-दतिया से श्री मुमताज खान, मैहर-सतना से श्री जनार्दन शुक्ला, सोनकच्छ-देवास से श्री बल बहादुर सिंह सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए विपणन सहकारी समितियों के अध्यक्ष, प्रतिनिधि, प्रबंधक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक में हुए व्यापक विचार-विमर्श से यह स्पष्ट हुआ कि विपणन सहकारी समितियों को मजबूत बनाने के लिए व्यवसाय विस्तार, पर्याप्त वित्तीय संसाधन, आधुनिक तकनीक, नए आय स्रोत और शासन स्तर पर प्रभावी सहयोग—इन सभी को एक साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।
