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वंदे मातरम् राष्ट्र की चेतना का अमर स्वर : डॉ. नितेश शर्मा

‘नमामि भारतम्’ के अंतर्गत सामूहिक गान में 300 सहभागियों ने एक स्वर में गाया राष्ट्रगीत

ग्वालियर, 25 सितंबर 2026। सरस्वती शिशु मंदिर, 165 सरस्वती नगर, ग्वालियर में शुक्रवार को ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत सामूहिक वंदे मातरम् गान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. नितेश शर्मा, मुख्य अतिथि श्री उदयभान रजक तथा अध्यक्षता श्रीमती रमा अवस्थी ने की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने भारत माता एवं मां सरस्वती का पूजन किया। प्राचार्य रवि उप्रेती ने अतिथियों का परिचय कराया। इसके बाद विद्यार्थी बहनों ने अतिथियों को श्रीफल एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

स्वतंत्रता संग्राम की चेतना से जुड़ा वंदे मातरम्

मुख्य वक्ता डॉ. नितेश शर्मा ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में रचा था। वर्ष 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंद मठ’ में इसका समावेश हुआ। इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने तैयार की थी।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत किया। 1886 के कांग्रेस अधिवेशन से लेकर 1896 में रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा इसके गायन और बाद के राष्ट्रीय आंदोलनों तक यह गीत स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा।

डॉ. शर्मा ने बंग-भंग आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् की व्यापक लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि 1905 में इसके सामूहिक गायन ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी। ब्रिटिश शासन ने इसकी लोकप्रियता को रोकने के लिए प्रतिबंध और दमनात्मक कार्रवाइयों का सहारा लिया। बरिसाल में जुलूस के दौरान वंदे मातरम् के उद्घोष पर पुलिस कार्रवाई तथा रंगपुर के विद्यार्थियों पर लगाए गए जुर्माने जैसे प्रसंग इसके ऐतिहासिक प्रभाव को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और मदनलाल ढींगरा सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से भी वंदे मातरम् का इतिहास जुड़ा रहा है। उन्होंने इसके विभिन्न भारतीय भाषाओं में हुए अनुवादों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी लोकप्रियता का भी उल्लेख किया।

150 वर्ष की स्मृति में राष्ट्रव्यापी आयोजन

डॉ. शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, स्वाभिमान और समर्पण का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि विद्या भारती द्वारा सामूहिक वंदे मातरम् गान जैसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकात्मता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और देश के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

सरस्वती शिशु मंदिर में कार्यक्रमकार्यक्रम में लगभग 300 सहभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। निर्धारित समय पर सभी ने एक स्वर और एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गान किया, जो 3 मिनट 13 सेकंड में पूर्ण हुआ। सामूहिक गान के दौरान विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति और देशप्रेम के भाव से गुंजायमान रहा। विद्यार्थियों ने देश की एकता, अखंडता और गौरव को बनाए रखने में अपना योगदान देने का संकल्प लिया।