रहवासी इलाकों में नियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों को वैध करने का प्रस्ताव, शुल्क और पार्किंग की शर्तें लागू होंगी; 51 किमी ग्रोथ कॉरिडोर, 27% हरित क्षेत्र और पुराने भोपाल को हेरिटेज जोन बनाने की योजना
भोपाल। करीब 21 साल के इंतजार के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट सामने आ गया है। प्रस्तावित मास्टर प्लान में शहर के मौजूदा स्वरूप को बदलने वाले कई बड़े प्रावधान किए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आवासीय क्षेत्रों में नियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान है।
ड्राफ्ट के मुताबिक निर्धारित शर्तों के तहत 12 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क वाले क्षेत्रों में मकान के साथ दुकान अथवा अन्य पात्र व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की गुंजाइश रहेगी। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि चौड़ी सड़क से लगा हर आवासीय प्लॉट स्वतः कमर्शियल हो जाएगा। नई कॉलोनियों में लेआउट स्वीकृति के समय ही कमर्शियल अथवा मिक्स्ड लैंड यूज वाले प्लॉट निर्धारित करने का प्रावधान बताया गया है।
पुराने कारोबार को भी नियमित करने का रास्ता
मौजूदा रहवासी क्षेत्रों में पहले से चल रही पात्र व्यावसायिक गतिविधियों को निर्धारित शर्तों के साथ नियमित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए सड़क की चौड़ाई, भवन निर्माण, पार्किंग और अन्य नियोजन मानकों का पालन करना होगा।
नियमितीकरण मुफ्त नहीं होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में आवासीय और कमर्शियल कलेक्टर रेट के अंतर के आधार पर शुल्क के साथ अन्य निर्धारित शुल्क और पार्किंग की कमी होने पर उसका शुल्क भी लिया जा सकता है। ड्राफ्ट में इस प्रक्रिया से सरकार को करीब 300 करोड़ रुपये की संभावित आय का अनुमान बताया गया है। इस राशि का इस्तेमाल संबंधित क्षेत्रों में पार्किंग, सड़क, फुटपाथ और अन्य नागरिक सुविधाओं के विकास में किए जाने का प्रस्ताव है।
51 किमी ग्रोथ कॉरिडोर और 3 हजार हेक्टेयर जमीन
भोपाल के भविष्य के विस्तार के लिए करीब 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर का प्रस्ताव है। इसके लिए करीब 3 हजार हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। योजना में निवेश क्षेत्र को बढ़ाकर करीब 1016.90 वर्ग किलोमीटर करने तथा 254 गांवों को योजना क्षेत्र में शामिल करने का भी प्रस्ताव सामने आया है।
वहीं शहर के हरित क्षेत्र को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। योजना में पर्यावरण संरक्षण, भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण पर भी जोर दिया गया है।
पूर्वी बायपास से आउटर रिंग रोड तक बड़ा विस्तार
प्रस्तावित योजना में पूर्वी बायपास के आसपास बड़े विकास की संभावनाएं रखी गई हैं। इसके अलावा नए बायपास/ग्रोथ कॉरिडोर तथा आउटर रिंग रोड के माध्यम से भोपाल के विस्तार को व्यवस्थित करने की योजना है।
नर्मदापुरम रोड से फंदा के आसपास होते हुए इंदौर रोड की दिशा में करीब 83.8 किलोमीटर लंबी और 60 मीटर चौड़ी आउटर रिंग रोड का प्रस्ताव भी इसी व्यापक परिवहन नेटवर्क का हिस्सा है।
पुराना भोपाल बनेगा हेरिटेज टूरिज्म जोन
पुराने भोपाल को हेरिटेज टूरिज्म जोन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी मास्टर प्लान की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। ऐतिहासिक इमारतों, किलों, महलों और पुराने शहर की विरासत को संरक्षित करते हुए उन्हें पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।
भोपाल के 14 ऐतिहासिक दरवाजों को भी इस विरासत योजना में शामिल किया गया है। हेरिटेज भवनों को म्यूजियम, आर्ट गैलरी और विरासत केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं रखी गई हैं। पुराने शहर की संकरी सड़कों और पार्किंग की समस्या को देखते हुए लोकल एरिया प्लान तथा आवश्यकता के अनुसार पार्किंग और मल्टीलेवल पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव है।
अभी फैसला बाकी, आपत्ति-सुझाव की प्रक्रिया महत्वपूर्ण
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मास्टर प्लान-2047 अभी अंतिम नहीं है, बल्कि ड्राफ्ट के स्तर पर है। ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। प्राप्त आपत्तियों और सुझावों की जांच तथा सुनवाई के बाद प्रस्तावों में आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं।
वर्तमान स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ड्राफ्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उसके सभी प्रावधान तत्काल लागू हो गए हैं। खासकर रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति के बावजूद अंतिम प्रकाशन/कार्यान्वयन न्यायालय की शर्तों से जुड़ा है।
यानी भोपाल का मास्टर प्लान-2047 अब कागज से सार्वजनिक बहस के चरण में पहुंच चुका है। 12 मीटर सड़क पर मकान-दुकान की संभावना से लेकर 51 किलोमीटर ग्रोथ कॉरिडोर, 27 प्रतिशत हरित क्षेत्र और पुराने भोपाल के हेरिटेज विकास तक—इन प्रस्तावों का वास्तविक असर अंतिम मास्टर प्लान और आगे होने वाली कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
