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नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सिस्टम की खुली पोल: गधे के नाम पर भी जारी हुआ सर्टिफिकेट- NSUI

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़? गधे का भी बना नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, MPNRC की ऑनलाइन व्यवस्था पर गंभीर सवाल

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भोपाल 29 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा और नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े विवादों के बीच अब मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने दावा किया है कि परिषद की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेजों के वास्तविक सत्यापन के बिना आवेदन आगे बढ़ने और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने की गंभीर खामी मौजूद है।

रवि परमार ने बताया कि उन्होंने परिषद की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए परीक्षण किया। उनके अनुसार, आवेदन में गधे (Donkey) की फोटो अपलोड की गई और आवश्यक दस्तावेजों के स्थान पर ऐसे दस्तावेज अपलोड किए गए, जिनमें कोई वास्तविक शैक्षणिक योग्यता प्रमाणित नहीं होती थी। इसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित शुल्क का भुगतान किया गया।

रवि परमार का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद गधे के नाम से नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया। उन्होंने कहा कि यदि यह परीक्षण आधिकारिक पोर्टल पर उसी प्रकार सफल हुआ है जैसा कि उनके द्वारा किया गया है, तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं बल्कि नर्सिंग पेशे में रजिस्ट्रेशन की विश्वसनीयता, दस्तावेज सत्यापन और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर प्रश्न है।

जब गधे का रजिस्ट्रेशन हो सकता है तो असली दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हो रहा है?

NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि गधे का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो जाता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि परिषद द्वारा आवेदक की पहचान, शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।

जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कोई सामान्य ऑनलाइन प्रमाणपत्र नहीं है। रजिस्टर्ड नर्सिंग प्रोफेशनल अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन जारी करने से पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता, संबंधित संस्थान, मार्कशीट, फोटो, पहचान और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का वास्तविक सत्यापन अत्यंत आवश्यक है।

अक्षय तोमर ने कहा कि इस पूरे मामले में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित नामों से जारी सर्टिफिकेट वास्तविक हैं या ऑनलाइन प्रणाली की किसी तकनीकी/सत्यापन संबंधी खामी के कारण उत्पन्न हुए हैं और इसके लिए जिम्मेदार कौन कौन अधिकारी हैं । NSUI ने मांग की है कि इन सभी मामलों की स्वतंत्र तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

फर्जी रजिस्ट्रेशन से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को हो सकता है खतरा

रवि परमार ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना वास्तविकगधे का सर्टिफिकेट नर्सिंग योग्यता के रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर लेता है और बाद में उस रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल अस्पताल, नर्सिंग होम या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में नौकरी के लिए करता है, तो इसका सीधा असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

परमार ने कहा कि नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के आधार पर किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी पेशेवर पहचान मिलती है। यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऐसे प्रमाणपत्र जारी हो सकते हैं, तो यह भविष्य में प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए यह केवल एक ऑनलाइन पोर्टल की समस्या नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा का विषय है।

अक्षय तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों से संबंधित अनियमितताओं को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे समय में यदि नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन व्यवस्था में भी गंभीर खामियां सामने आती हैं तो शासन को इसे बेहद गंभीरता से लेना चाहिए।