धार में 2024 के दावों की खुली पोल? मनावर–कुक्षी रोड के लिए ₹7.72 करोड़, चार ब्लैक स्पॉट पर ₹1.88 करोड़ और नौ सड़कों के मेंटेनेंस के लिए ₹21.88 करोड़—सवाल सड़क की उम्र का नहीं, जवाबदेही का है
धार। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की कार्यप्रणाली पर धार जिला/संभाग में अब सवाल सिर्फ सड़क की खराब हालत को लेकर नहीं, बल्कि सड़क सुधार के नाम पर लगातार निकल रहे करोड़ों रुपये के नए कार्यों को लेकर खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि धार जिला प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध MPRDC की वर्ष 2024 की एक सरकारी सामग्री में बारिश के दौरान सड़कों की मरम्मत को “युद्धस्तर” पर जारी बताते हुए पांच मुख्य अभियंता, पांच महाप्रबंधक एवं शेष संभागीय स्तर के अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी का दावा किया गया था। उस समय MPRDC के प्रबंध संचालक अविनाश लवानिया थे।
दो साल बाद तस्वीर बदल गई है। अब उसी व्यवस्था में सड़क Renewal, Maintenance और Black Spot Rectification के नाम पर करोड़ों रुपये के नए टेंडर सामने हैं। सवाल सीधा है—अगर 2024 में सड़कें युद्धस्तर पर सुधारी गई थीं और उनकी लगातार निगरानी हो रही थी, तो 2026 में वही सड़कें और वही सड़क नेटवर्क फिर करोड़ों रुपये के मेंटेनेंस और सुधार की जरूरत में क्यों खड़े हैं?
2024 का ‘युद्धस्तर’ बनाम 2026 का करोड़ों का मेंटेनेंस
MPRDC के रिकॉर्ड के मुताबिक मनावर–सिंगाना–कुक्षी रोड के Renewal एवं Maintenance के लिए करीब ₹7.72 करोड़ का टेंडर जारी हुआ। अगस्त 2026 में टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई और सितंबर में वित्तीय बोली खोली गई। यानी जिस सड़क नेटवर्क के रखरखाव पर लगातार निगरानी का दावा किया गया था, उसके लिए दो साल बाद फिर करोड़ों रुपये का प्रावधान सामने है।
यहीं से सवाल उठता है—क्या 2024 की मरम्मत स्थायी सुधार थी या केवल तत्कालीन गड्ढे भरने तक सीमित कार्रवाई? यदि सड़क का जीवन, गुणवत्ता और मेंटेनेंस रिकॉर्ड उपलब्ध है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
चार ब्लैक स्पॉट पर ₹1.88 करोड़, फिर नए ब्लैक स्पॉट पर करीब ₹3 करोड़
MPRDC ने ब्लैक स्पॉट क्रमांक 163, 230, 231 और 233 के Long Term Rectification के लिए लगभग ₹1.88 करोड़ का टेंडर किया। सड़क सुरक्षा के लिहाज से ब्लैक स्पॉट वे स्थान हैं जहां दुर्घटनाओं का जोखिम अधिक माना जाता है। ऐसे स्थानों पर सुधार होना जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि इन स्थानों को ब्लैक स्पॉट बनने से रोकने की जिम्मेदारी किस व्यवस्था की थी और सुधार में इतनी देर क्यों हुई?
इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट क्रमांक 232, कसरावद ब्रिज से जीतू ढाबा के बीच बड़वानी–कुक्षी–चांदपुर रोड पर Lane Widening और Junction Improvement के लिए लगभग ₹2.98 करोड़ का नया टेंडर सितंबर 2026 में जारी हुआ। इसकी अंतिम तारीख 21 अक्टूबर 2026 है।यानी एक तरफ पुराने ब्लैक स्पॉट सुधारने के लिए पैसा लगाया जा रहा है और दूसरी तरफ नए ब्लैक स्पॉट पर भी करोड़ों का प्रावधान सामने आ रहा है।
नौ सड़कों के लिए ₹21.88 करोड़—मेंटेनेंस का सिलसिला खत्म क्यों नहीं होता?
19 सितंबर 2026 को जारी STMC टेंडर में धार और इंदौर MPRDC डिवीजन की नौ सड़कों के Short Term Maintenance Contract के लिए करीब ₹21.88 करोड़ का अनुमान सामने आया। इसमें धार संभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण सड़कें भी शामिल हैं। इनमें सरदारपुर–बदनावर लगभग 43 किमी, नागदा–धार–गुजरी करीब 19.50 किमी और मनावर रोड करीब 42.70 किमी शामिल हैं।
यहां सवाल किसी एक ठेकेदार पर आरोप का नहीं है। सवाल उस पूरी व्यवस्था से है जिसके तहत सड़क निर्माण, मरम्मत, Renewal, Short Term Maintenance और Black Spot Rectification लगातार अलग-अलग पैकेजों में सामने आते हैं।
आखिर सड़क बनती कितने साल के लिए है?यदि हर कुछ वर्ष में उसी सड़क को फिर Renewal और Maintenance की जरूरत पड़ती है तो उसकी मूल गुणवत्ता, निर्माण मानक, निरीक्षण और Defect Liability की जांच कौन करेगा?
पुल भी ‘Poor’ और ‘Very Poor’, फिर मरम्मत के करोड़ों के पैकेज
मामला केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। MPRDC के रिकॉर्ड में धार से जुड़े विभिन्न डिवीजनों के Poor और Very Poor Category Bridges के लिए भी अलग-अलग मरम्मत पैकेज सामने आए हैं।
Dhar–Indore Division में Rau–Mhow–Mandleshwar Road, Khandwa–Dedtalai–Burhanpur Road और Thandla–Limdi Road के Poor Bridges से जुड़े पैकेज का मूल्य करीब ₹1.70 करोड़ बताया गया है। वहीं Ujjain–Indore–Dhar Division में Poor Bridges के एक पैकेज की लागत करीब ₹1.60 करोड़ और Bhopal–Dhar–Sagar Division के एक पैकेज की लागत करीब ₹90 लाख है।
सवाल फिर वही है—MPRDC के अपने रिकॉर्ड में पुल ‘Poor’ और ‘Very Poor’ श्रेणी तक पहुंचने से पहले उनकी नियमित निगरानी और preventive maintenance व्यवस्था कहां थी?
अब MPRDC से चाहिए सिर्फ जवाब
धार की सड़कों पर सवाल उठाना किसी विकास कार्य का विरोध नहीं है। सड़कें बनें, पुल सुरक्षित हों और ब्लैक स्पॉट सुधरें—यह जनता का अधिकार है। लेकिन हर नए टेंडर के साथ पुरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
MPRDC को सार्वजनिक करना चाहिए—
- 2024 में जिन सड़कों की मरम्मत “युद्धस्तर” पर कराई गई, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?
- 2024 के बाद उन्हीं सड़कों पर कितना पैसा खर्च हुआ?
- 2026 में Renewal और Maintenance के लिए फिर कितनी राशि स्वीकृत हुई?
- ब्लैक स्पॉट 163, 166, 168, 230, 231, 232 और 233 पर पहले क्या-क्या काम हुए?
- उन कार्यों पर कितना खर्च हुआ और उनकी Defect Liability कितनी थी?
- Poor और Very Poor पुलों की स्थिति नियमित निरीक्षण में पहले क्यों नहीं सुधारी गई?
- और सबसे अहम—करोड़ों के इन नए कार्यों के बाद जनता को कितने साल की गारंटी मिलेगी?
सवाल अब यह नहीं है कि सड़क पर गड्ढा है या नहीं। सवाल यह है कि सड़क सुधारने के लिए करोड़ों खर्च करने के बावजूद गड्ढे और ब्लैक स्पॉट बार-बार वापस क्यों आ रहे हैं?
2024 में दावा था—“युद्धस्तर पर सड़क सुधार।”
2026 में रिकॉर्ड कह रहा है—“फिर करोड़ों का Renewal, Maintenance और Rectification।”
इन दोनों के बीच का हिसाब ही अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिरकार निगरानी एवं निरीक्षण के लिए नियुक्त दर्जनों अधिकारीयों की क्या भूमिका रही?
