खातेगांव में अवैध शराब से भरे मिनी ट्रक को रोकने पहुंचे थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत; 1,800 लीटर शराब जब्त, गुजरात तक फैले तस्करी नेटवर्क की जांच के लिए SIT गठित। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के ज्ञापन और ग्रामीणों की शिकायतें खोल रही हैं अवैध शराब के खुले कारोबार की परतें, नवागत जिला आबकारी अधिकारी के सामने बड़ी चुनौती..
देवास 2 नवंबर 2026। यद्यपि इसे शराब माफियाओं के बुलंद हौसले कहें या पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए भागने के दौरान हुई एक दर्दनाक वारदात, लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि देवास जिले में अवैध शराब के कारोबार और उसकी आपूर्ति का नेटवर्क गंभीर सवालों के घेरे में है। जिले में जहरीली शराब से 13 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी यदि अवैध शराब से भरे ट्रक सड़कों पर दौड़ रहे हैं और उन्हें रोकने पहुंचे पुलिस अधिकारियों की जान जा रही है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि आबकारी और पुलिस की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल है।
देवास जिले में अवैध शराब की बिक्री और परिवहन को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार लिखित एवं मौखिक शिकायतें किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर शिकायतों के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? क्या कार्रवाई केवल किसी बड़े हादसे के बाद ही तेज होती है?
13 मौतों के बाद भी जारी रहा अवैध शराब का खेल?
देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 के बीच करीब 13 मजदूरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। जिस पर हुई प्रशासनिक स्तर की बड़ी कार्रवाई में तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पद से हटाया गया और जिला आबकारी अधिकारी सहित तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया। पुलिस ने इस मामले में 10 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार भी किया।
लेकिन इतनी बड़ी घटना और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी जिले में अवैध शराब की आवाजाही का मामला सामने आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
शराब से भरे ट्रक को रोकने पहुंचे TI की चली गई जान
जहरीली शराब कांड के बाद अवैध शराब के विरुद्ध चल रहे अभियान के बीच 1 और 2 नवंबर की दरम्यानी रात करीब 1:30 बजे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी अपनी पुलिस टीम के साथ इंदौर-बैतूल हाईवे पर मुखबिर की सूचना के आधार पर एक संदिग्ध मिनी ट्रक को रोकने पहुंचे थे।
बताया गया कि वाहन में अवैध शराब भरी हुई थी। थाना प्रभारी ने चालक को नीचे उतरने के लिए कहा, लेकिन पकड़े जाने के डर से चालक ने वाहन रोकने के बजाय डिवाइडर पर चढ़ा दिया। इस दौरान ट्रक का पिछला पहिया थाना प्रभारी के ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल दिलीप पुरी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
घटना के बाद संदलपुर में छोड़े गए ट्रक को पुलिस ने जब्त किया। उसमें करीब 1,800 लीटर यानी 208 पेटियां अवैध विदेशी शराब बरामद होने की जानकारी सामने आई है। शराब गुजरात ले जाए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने फरार चालक को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे तस्करी नेटवर्क की जांच के लिए SIT गठित की गई है।
आबकारी विभाग को ही नहीं थी वाहन की जानकारी!
इस पूरे घटनाक्रम में खातेगांव की आबकारी उप निरीक्षक पूजा गहलोत का बयान भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि विभाग को इस वाहन की जानकारी नहीं थी, क्योंकि उसके पास कोई परमिट नहीं था। उनका कहना था कि यदि वैध परमिट होता तो विभाग यह बता सकता था कि शराब कहां से आई और कहां जा रही थी।
यहां यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में शराब लेकर वाहन किस रास्ते से गुजर रहा था? शराब का स्रोत क्या था? इसे किसने लोड किया और गुजरात में इसकी आपूर्ति किसे की जानी थी? क्या इस नेटवर्क में केवल चालक और वाहन मालिक शामिल हैं या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित तंत्र काम कर रहा है? इन सवालों के जवाब SIT की जांच से सामने आने जरूरी हैं।
जनप्रतिनिधियों के ज्ञापन, ग्रामीणों की शिकायतें और ढाबों पर शराब की उपलब्धता के आरोप
खातेगांव क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री का मुद्दा केवल पुलिस की हालिया कार्रवाई तक सीमित नहीं है। जनपद पंचायत उपाध्यक्ष मनीष पटेल द्वारा तहसीलदार खातेगांव को दिए गए ज्ञापन में मां नर्मदा के तट स्थित सिद्ध स्थलों सहित विभिन्न स्थानों पर अवैध शराब की बिक्री का उल्लेख किया गया है।
वहीं स्थानीय लोगों की शिकायतों के मुताबिक कन्नौद-कुसमानिया-आष्टा मार्ग पर स्थित कई ढाबों और होटलों पर शराब उपलब्ध होने के आरोप हैं। कुसमानिया और हरण गांव क्षेत्र की किराना दुकानों तक पर शराब मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
इन शिकायतों की सच्चाई एक जांच का विषय है कि आखिर अवैध शराब की बिक्री किन लोगों के संरक्षण या लापरवाही में चल रही है? स्थानीय स्तर पर शिकायतें होने के बावजूद नियमित जांच और कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
राकेश कुर्मी के सिर पर कांटों भरा ताज
जहरीली शराब कांड के बाद निलंबन और प्रशासनिक फेरबदल के बीच राकेश कुर्मी को जिला आबकारी अधिकारी की जिम्मेदारी मिलना आसान चुनौती नहीं है। जिले में पहले से मौजूद अवैध शराब के कारोबार, कथित स्थानीय बिक्री नेटवर्क, ढाबों और किराना दुकानों से जुड़ी शिकायतों तथा अंतरजिला एवं अंतरराज्यीय तस्करी की आशंकाओं के बीच उनके सामने विभाग की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
हालांकि इस मामले को नवागत AC राकेश कुमार कुर्मी से जोड़ना फिलहाल मुनासिब नहीं होगा। यह घटना उनके पदभार और जिम्मेदारी के संदर्भ में एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती जरूर है, लेकिन घटना के लिए उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का कोई आधार अभी सामने नहीं आया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या देवास में अवैध शराब के कारोबार पर वास्तव में लगाम लगेगी या फिर जहरीली शराब से हुई मौतों, पुलिस अधिकारी की शहादत और प्रशासनिक फेरबदल के बाद भी यह कारोबार अपनी पुरानी रफ्तार से चलता रहेगा? देवास की जनता को केवल गिरफ्तारियों और निलंबन की खबरें नहीं, बल्कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई और उसकी नियमित निगरानी का ठोस परिणाम चाहिए।
