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BOT की उलझी कहानी : 50.86 किमी भिंड-मिहोना-गोपालपुर टोल रोड पर बड़ा सवाल!

20 वर्ष की रियायत, 15 वर्ष की शर्त और फिर अनुबंध समाप्त… आखिर अब किस व्यवस्था से वसूला जा रहा है टोल?

ग्वालियर/भिंड। भिंड-मिहोना-गोपालपुर की 50.86 किलोमीटर लंबी टोल सड़क की कहानी अब केवल एक सड़क परियोजना तक सीमित नहीं रह गई है। दस्तावेज़ बताते हैं कि जिस परियोजना को निजी भागीदारी के तहत BOT (Build-Operate-Transfer) मॉडल पर शुरू किया गया था, वही आज कई कानूनी और प्रशासनिक सवालों के केंद्र में है।

परियोजना से जुड़े उपलब्ध अभिलेख बताते हैं कि वर्ष 2009 में रियायत समझौता हुआ तथा 2010 में परियोजना प्रभावी हुई। इसके बाद निजी रियायतधारी को निर्माण, संचालन और टोल वसूली का अधिकार मिला। युगक्रांति की पड़ताल में सामने आए दस्तावेज़ों के अनुसार इस परियोजना का रियायत (Concession) समझौता Essel Infraprojects Ltd. की विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) Bhind Mihona Gopalpur Toll Roads Ltd. के साथ हुआ था। समझौते में सामान्य रूप से 20 वर्ष की रियायत अवधि का प्रावधान था।

लेकिन इसी समझौते में एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई थी। शर्त यह थी कि यदि निर्धारित समय सीमा में सड़क का Two-Lane Plus मानकों के अनुरूप उन्नयन नहीं किया जाता है, तो रियायत अवधि 20 वर्ष के स्थान पर 15 वर्ष मानी जाएगी और यह रियायत अवधि फरवरी 2025 के आसपास समाप्त हो सकती थी।

यहीं से पूरी कहानी में आया नया ट्विस्ट

उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार Two-Lane Plus उन्नयन की शर्त को लेकर रियायतधारी कंपनी और मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। मामला अंततः मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे प्रस्तुत किए।

इसी विवाद के दौरान MPRDC ने यह रुख अपनाया कि रियायत समझौते की शर्तों का पालन नहीं हुआ है। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार बाद में निगम ने कंपनी का अनुबंध (Concession) समाप्त (Terminate) कर दिया।

यहीं से पैदा हुआ सबसे बड़ा सवाल

BOT मॉडल का मूल उद्देश्य यह नहीं है कि निजी कंपनी अनिश्चितकाल तक टोल वसूले। उसका उद्देश्य निर्धारित रियायत अवधि तक निवेश की वसूली और सड़क का रखरखाव है। इसके बाद परियोजना सरकार के नियंत्रण में लौटती है।

यदि मूल BOT रियायत समाप्त कर दी गई, तो आज भिंड-मिहोना-गोपालपुर मार्ग पर टोल किस व्यवस्था और किस वैधानिक अधिकार के तहत वसूला जा रहा है?
क्या यह सड़क आज भी BOT परियोजना है, जैसा कि विभागीय स्तर पर कई बार बताया जाता है, या इसकी व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है?

युगक्रांति की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वह इस सवाल का उत्तर देने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। जिसका खुलासा अगले भाग में किया जाएगा।

अगले अंक में…

दस्तावेज़ों में User Fee, ज़ुबान पर BOT… भिंड टोल रोड का दूसरा बड़ा खुलासा