ब्रेकिंग

MPRDC में एक्सेस परमिशन का ‘खेल’? ROW नियमों में ढील

जीएम दिवाकर शुक्ला और CGM प्रदीप जैन पर गंभीर आरोप

भोपाल 18 मार्च 2026। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला “एक्सेस परमिशन” के नाम पर पूरे प्रदेश में चल रहे कथित खेल का है, जिसमें अनुमति शाखा के महाप्रबंधक दिवाकर शुक्ला और मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) प्रदीप जैन की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि पेट्रोल पंप, होटल, गोदाम जैसे बड़े प्रतिष्ठानों को हाईवे से एंट्री-एग्जिट देने की प्रक्रिया—जो पूरी तरह सुरक्षा और नियमों पर आधारित होनी चाहिए—उसे कमाई का जरिया बना दिया गया है। कहा जा रहा है कि नियमों को शिथिल कर मनमाने तरीके से परमिशन दी जा रही है, और कई मामलों में फील्ड निरीक्षण कागजों में ही पूरा दिखा दिया जाता है।

हकीकत यह है कि MPRDC की सड़क से सीधे कनेक्शन के लिए “Access Permission” अनिवार्य है। सड़क की पूरी आरक्षित चौड़ाई यानी ROW (Right of Way) के भीतर किसी भी तरह का प्रवेश/निकास बिना अनुमति नहीं दिया जा सकता। यही वह सबसे अहम बिंदु है, जिस पर सुरक्षा और पारदर्शिता टिकी होती है।

लेकिन आरोप हैं कि इसी प्रक्रिया में सब कुछ ठीक होने के बावजूद भी बिना ‘चढ़ावे’ फाइल आगे नहीं बढ़ती। सूत्रों के मुताबिक, हर महीने दर्जनों परमिशन जारी होती हैं और इसमें करोड़ों के लेन-देन की चर्चा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई मामलों में ROW के भीतर ही नियमों की अनदेखी कर कट दिए गए, जिससे सड़क सुरक्षा पर सीधा खतरा खड़ा होता है। यदि यह सच है, तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि आम लोगों की जान से जुड़ा मुद्दा है।

सूत्र यह भी बताते हैं कि अनुमति शाखा से जुड़े फैसले सीमित दायरे में केंद्रित हैं। इस खेल में CGM प्रदीप जैन की सवालिया भूमिका में जीएम दिवाकर शुक्ला को प्रमुख सूत्रधार बताया जा रहा है। इसी के चलते शुक्ला जी का विभागीय समय का बड़ा हिस्सा इन्हीं फाइलों के इर्द-गिर्द अथवा जैन साहब की ऑफिस में गुजरने की सूत्र पुष्टि करते हैं। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या MPRDC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि उनका पक्ष आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

सवाल सीधा है_क्या सड़क सुरक्षा के नाम पर बनाई गई व्यवस्था ही अब वसूली का माध्यम बन गई है? और अगर हां, तो इसकी जिम्मेदारी तय कौन करेगा? फिलहाल युग क्रांति की पड़ताल जारी है।

इस पूरे मामले में स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि “एक्सेस परमिशन” वास्तव में नियमों के तहत दी जा रही है या फिर यह एक संगठित खेल का हिस्सा बन चुकी है।