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एनजीटी के रडार पर मध्य प्रदेश: भोपाल के तालाबों पर ‘बुलडोजर’ का काउंटडाउन, ग्वालियर की स्वर्ण रेखा पर प्रशासन को लीगल नोटिस की तैयारी!

युग क्रांति विशेष खोजी रिपोर्ट ..

युग क्रांति का बड़ा खुलासा: कोर्ट के आदेश के 40 दिन बाद भी फाइलों में दबा रहा कलियासोत का टाइगर कॉरिडोर, ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नदी को नाला बनाने वाले अफसरों पर कसेगा कानूनी शिकंजा।

विशेष ब्यूरो, भोपाल/ग्वालियर। मध्य प्रदेश में पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संसाधनों को तबाह करने वाले भू-माफियाओं और लापरवाह अफसरों के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। ‘युग क्रांति‘ की पड़ताल में सामने आया है कि राजधानी भोपाल के भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब) और ग्वालियर की जीवन रेखा कही जाने वाली स्वर्ण रेखा नदी को लेकर एनजीटी जल्द ही ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाने जा रही है।

भोपाल: बड़ा तालाब के FRL में अवैध निर्माण, सैलरी रोकने की चेतावनी

एनजीटी भोपाल बेंच में चल रहे Case No. O.A. 42/2026 की हालिया सुनवाई में जजों ने नगर निगम भोपाल और जिला प्रशासन के रवैये पर भारी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (FRL) और कैचमेंट एरिया में बने अवैध मैरिज गार्डन और पक्के निर्माणों को तुरंत जमींदोज किया जाए।
यदि अगली तय समय सीमा के भीतर इन अवैध निर्माणों पर पीला पंजा (बुलडोजर) नहीं चला, तो कोर्ट जिम्मेदार अधिकारियों की निजी सैलरी रोकने और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का मन बना चुकी है।

ग्राउंड जीरो ग्वालियर: करोड़ों बहे, फिर भी स्वर्ण रेखा बनी खुला नाला

एनजीटी में जहाँ भोपाल के तालाबों को लेकर जंग जारी है, वहीं ‘युग क्रांति’ की टीम ने ग्वालियर की स्वर्ण रेखा नदी का ग्राउंड रियलिटी चेक किया। रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है। नदी के सौंदर्यीकरण और सफाई के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज स्वर्ण रेखा नदी सिर्फ एक बदबूदार खुला नाला बनकर रह गई है।
स्वर्णरेखा ग्वालियर
  • शहर भर की सीवेज लाइनों का गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदी में उड़ेला जा रहा है।
  • सॉलिड वेस्ट (कचरा) मैनेजमेंट के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
  • नियमों के मुताबिक नदियों में अनट्रीटेड सीवेज डालना संगीन अपराध है, लेकिन ग्वालियर प्रशासन इस पर गहरी नींद में सोया है। पर्यावरणविदों के मुताबिक, इस मामले को लेकर एनजीटी में एक नई जनहित याचिका के जरिए अफसरों को व्यक्तिगत रूप से पार्टी बनाने (लीगल नोटिस भेजने) की तैयारी पूरी हो चुकी है।

वादे बनाम हकीकत: 40 दिन बीते, एक इंच भी नहीं हटा अतिक्रमण

  • केस: भोपाल के कलियासोत डेम के पास टाइगर्स के मूवमेंट एरिया (ग्रीन बेल्ट) में भू-माफियाओं द्वारा की गई अवैध फेंसिंग का मामला।
  • एनजीटी का निर्देश: कोर्ट ने जिला प्रशासन और वन विभाग को संयुक्त टीम बनाकर 30 दिनों के भीतर इस संवेदनशील कॉरिडोर को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दिया था।
  • हकीकत: आज इस आदेश को आए 40 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन जमीन पर एक इंच भी फेंसिंग नहीं हटाई गई है।

युग क्रांति का सीधा सवाल:आखिर भोपाल और ग्वालियर का जिला प्रशासन कोर्ट के इन सख्त आदेशों को ठंडे बस्ते में क्यों डाल रहा है? क्या मध्य प्रदेश के रसूखदार भू-माफियाओं का कद और दबाव, माननीय अदालत के आदेशों से भी ज्यादा बड़ा हो चुका है?

जनता से अपील (Call to Action)

क्या आपके इलाके में भी तालाबों को सुखाया जा रहा है या पेड़ों की अवैध कटाई हो रही है? चुप मत रहिए! नाम गोपनीय रखा जाएगा। अपनी शिकायत, फोटो या वीडियो सीधे ‘युग क्रांति’ के पर्यावरण सेल (WhatsApp: 9479877111) पर भेजें। हम आपकी आवाज बनेंगे!