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MPRDC की सड़कों में करोड़ों के सवाल! CAG ने खोली लापरवाही की परतें

ठेकेदारों पर ₹30.11 करोड़ की पेनल्टी, ₹9.37 करोड़ की गुणवत्ता वसूली और ₹5.34 करोड़ के मटेरियल एडवांस का हिसाब अटका; 652 करोड़ के कामों पर भी उठी आपत्ति

भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़कों और हाईवे के निर्माण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करने वाली मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) की कार्यप्रणाली पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दस्तावेज बताते हैं कि जहां सरकार बेहतर और आधुनिक सड़क नेटवर्क का दावा करती है, वहीं MPRDC की कई परियोजनाओं में काम की रफ्तार, गुणवत्ता, ठेकेदारों से वसूली और अनुबंधों की निगरानी सवालों के घेरे में रही।

ठेकेदार लेट, विभाग की वसूली गायब

CAG ऑडिट में सामने आया कि कुछ परियोजनाओं में ठेकेदारों की देरी के बावजूद लगभग ₹30.11 करोड़ की देरी क्षतिपूर्ति (Delay Damages) वसूल नहीं की गई। यानी अनुबंध में देरी की कीमत ठेकेदारों से वसूलने का प्रावधान मौजूद था, लेकिन करोड़ों रुपये की वसूली लंबित रही।

सबसे चौंकाने वाला मामला ADB परियोजनाओं के पैकेज-10 और 11 से जुड़ा है। इन दोनों में काम की प्रगति क्रमशः महज 24.48 प्रतिशत और 17.65 प्रतिशत तक पहुंची थी। CAG के अनुसार इन मामलों में करीब ₹37.47 करोड़ की देरी क्षतिपूर्ति भी वसूल नहीं की गई। काम में क्रमशः 1,254 दिन और 1,166 दिन का समय-अतिक्रमण सामने आया और अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई में भी देरी हुई।

काम अधूरा, फिर भी मटेरियल एडवांस का खेल?

ऑडिट में एक और गंभीर सवाल Material Advance को लेकर सामने आया। एक पैकेज में काम छोड़ दिए जाने के बाद भी लगभग ₹1.02 करोड़ का मटेरियल एडवांस भुगतान किया गया। वहीं करीब ₹5.34 करोड़ का मटेरियल एडवांस वसूली योग्य पाया गया, जबकि साइट पर उपलब्ध मटेरियल का मूल्य केवल लगभग ₹1.66 करोड़ था।

सवाल सीधा है—जब ठेकेदार काम पूरा नहीं कर रहे थे, तब एडवांस भुगतान और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? और सरकारी धन की वसूली के लिए समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

घटिया सड़क की कीमत भी जनता क्यों चुकाए?

CAG ने कुछ पैकेजों में PQC (Pavement Quality Concrete) की निर्धारित मजबूती नहीं मिलने की बात भी दर्ज की। पैकेज-8 और पैकेज-4 में गुणवत्ता संबंधी कमियों के चलते करीब ₹9.37 करोड़ की वसूली बनती थी, लेकिन ऑडिट के समय तक यह राशि वसूल नहीं की गई थी।

यानी एक तरफ जनता से बेहतर और टिकाऊ सड़कों के नाम पर पैसा लिया जा रहा है, दूसरी तरफ निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद भी करोड़ों की रिकवरी अटकी हुई है।

₹652 करोड़ के कामों पर भी CAG की आपत्ति

मामला केवल ठेकेदारों की देरी और गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। CAG ने ADB-V परियोजना में 11 State Highways को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की। ऑडिट के अनुसार निर्धारित पात्रता में 82 MDR सड़कें उपलब्ध होने के बावजूद इन State Highways को शामिल किया गया, जिससे करीब ₹652.21 करोड़ का अनियमित व्यय सामने आया।

सबसे गंभीर आरोपों में से एक अनधिकृत सब-कॉन्ट्रैक्टिंग का भी है। पैकेज-11 में कुल लगभग ₹161.71 करोड़ के कार्य का 49.74 प्रतिशत यानी करीब ₹80.44 करोड़ दूसरे पक्ष को सब-कॉन्ट्रैक्ट किया गया और आगे पांच अन्य पक्षों को काम दिए जाने की बात CAG ऑडिट में सामने आई। यह सब विभागीय अनुमति के बिना किए जाने का उल्लेख ऑडिट में है। इस पैकेज में काम की प्रगति महज 17.65 प्रतिशत रहने के बाद अंततः अनुबंध समाप्त करना पड़ा।

अब जवाबदेही किसकी?

CAG की आपत्तियां केवल आंकड़े नहीं हैं। ये उस व्यवस्था की पड़ताल हैं जिसमें करोड़ों-अरबों रुपये की सड़क परियोजनाएं स्वीकृत होती हैं, ठेकेदारों को भुगतान होता है, काम में देरी और गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, लेकिन सरकारी वसूली और जवाबदेही वर्षों तक लंबित रहती है।

युग क्रांति का सवाल है—अगर ठेकेदार समय पर काम नहीं करता, गुणवत्ता मानक पूरे नहीं करता या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसकी कीमत सरकारी खजाना क्यों भुगते? इसी क्रम में युग क्रांति की पड़ताल फिलहाल जारी है।

अब जरूरत केवल नई सड़क परियोजनाओं की घोषणा की नहीं, बल्कि MPRDC की उन पुरानी परियोजनाओं की पैकेजवार जांच, पेनल्टी की वास्तविक वसूली, Material Advance की रिकवरी, गुणवत्ता परीक्षण और अनधिकृत सब-कॉन्ट्रैक्टिंग की स्वतंत्र समीक्षा की है। CAG की आपत्तियों पर अब तक हुई कार्रवाई और वास्तविक वसूली का पूरा हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए।

क्रमशः…. आगे