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जहरीली शराब कांड के बाद जागा तंत्र?, ग्वालियर में दो दिन में 93 केस

52 पुलिस केस, आबकारी के 41 प्रकरण—क्या कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?

ग्वालियर। सागर जिले में जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत के बाद आखिरकार पुलिस और आबकारी अमले की नींद खुल गई है। अवैध शराब के खिलाफ अब ताबड़तोड़ कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। ग्वालियर में पुलिस ने महज दो दिन के विशेष अभियान में 52 से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज कर करीब 52 आरोपियों को पकड़ा है, जबकि आबकारी विभाग ने भी 41 प्रकरण दर्ज किए हैं।

ग्वालियर पुलिस के मुताबिक 52 मामलों में से 30 प्रकरण शहर के थानों में और 22 मामले देहात क्षेत्र के डबरा, भितरवार, घाटीगांव और बेहट सर्कल में दर्ज किए गए। कार्रवाई में लाखों रुपए की अवैध शराब जब्त की गई है। आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि एक दिन में एक साथ 50 से अधिक प्रकरण दर्ज करने की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। सीएसपी हेडक्वार्टर रॉबिन जैन के अनुसार अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा संगठित गिरोहों और अवैध शराब के मुख्य स्रोतों तक पहुंचकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

उधर आबकारी विभाग ने भी ग्वालियर संभाग में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाकर कई स्थानों पर छापेमारी की और भारी मात्रा में शराब तथा शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जब्त की है।

सवाल कार्रवाई पर नहीं, कार्रवाई के समय पर है

ग्वालियर आबकारी एवं पुलिस कार्रवाई

कार्रवाई निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अवैध शराब का कारोबार सागर त्रासदी के बाद अचानक शुरू हुआ? अगर अवैध शराब का निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री आबकारी विभाग के नियमित प्रवर्तन और निगरानी के दायरे में है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई के लिए कई दर्जन मौतों जैसी भयावह घटना का इंतजार क्यों करना पड़ा?

आज 50 से ज्यादा प्रकरण दर्ज होना और दर्जनों आरोपियों की गिरफ्तारी को बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। लेकिन यही आंकड़े एक दूसरा सवाल भी खड़ा करते हैं—अगर इतने मामले महज एक-दो दिन की सक्रियता में सामने आ सकते हैं, तो सामान्य दिनों में मैदानी अमला आखिर क्या कर रहा था?

दरअसल, अवैध शराब के खिलाफ एफआईआर और शराब की जब्ती अभियान की केवल प्रारंभिक कड़ी है। असली परीक्षा अब शुरू होगी।

असली कार्रवाई छापे के बाद होगी

सवाल यह नहीं कि कितनी शराब जब्त हुई और कितने केस दर्ज हुए। सवाल यह है कि यह शराब आई कहां से, बनी कहां, किसने सप्लाई की, किस नेटवर्क के जरिए गांवों और शहरों तक पहुंची और इसके पीछे कौन लोग हैं?

अगर जांच सिर्फ छोटे विक्रेताओं और मौके पर मिले आरोपियों तक सीमित रह गई तो यह अभियान भी आंकड़ों की खानापूर्ति बनकर रह जाएगा। जरूरत है कि जांच आपूर्ति श्रृंखला, निर्माण स्थलों, थोक सप्लायरों, परिवहन नेटवर्क और संरक्षण देने वाले लोगों तक पहुंचे।

हाल ही में वाणिज्यकर आयुक्त अमित राठौर ने भी आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसे ही सवाल खड़े किए थे। अब सागर की त्रासदी के बाद शुरू हुआ यह विशेष अभियान उन सवालों की भी अग्निपरीक्षा है।

देखना होगा कि ग्वालियर-चंबल में चल रहा यह अभियान वास्तव में अवैध शराब के नेटवर्क की जड़ें काटता है या फिर सागर कांड के बाद उठे आक्रोश को शांत करने तक सीमित रह जाता है? क्योंकि शराब की कुछ बोतलें जब्त करना कार्रवाई है, लेकिन शराब के पूरे नेटवर्क को खत्म करना ही असली सफलता होगी।