मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शिवराज, ऐदल सिंह कंसाना, सिंधिया और तोमर के नाम-फोटो गायब होने पर सवाल; बाहर से आई भीड़ ने कहा—‘हमें तो सचिव-सरपंच लेकर आए’
ग्वालियर 3 सितंबर 2026। बलराम जयंती के अवसर पर कल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आतिथ्य और अपेक्स बैंक के अध्यक्ष महेंद्र यादव के आयोजन में हुआ किसान समृद्धि सम्मेलन अब अपनी घोषणाओं से ज्यादा आयोजन की राजनीतिक तस्वीर और भीड़ जुटाने की कवायद को लेकर चर्चा में है। जहां सहकारी बैंक और ग्राम पंचायत के सचिवों ने महिलाओं, बच्चों, जवानों एवं वृद्धों भीड़ जुटाने का काम किया।
कार्यक्रम का प्रचार किसानों की समृद्धि और कल्याण की बड़ी सौगात के रूप में किया गया, लेकिन कार्यक्रम के लिए जारी पंपलेट ने ही कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। पंपलेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कुछ प्रमुख नेताओं के चित्र दिखाई देते हैं, लेकिन प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का फोटो और नाम तक नजर नहीं आता। यही नहीं, ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति के दो बड़े चेहरे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम में मौजूद रहे, लेकिन प्रचार सामग्री में उन्हें भी जगह नहीं मिली।
किसानों का सम्मेलन था या भीड़ जुटाने का शक्ति प्रदर्शन?
कार्यक्रम स्थल की तस्वीरें एक बड़े जनसमूह की मौजूदगी जरूर दिखाती हैं, लेकिन इस भीड़ की वास्तविक भागीदारी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों से बातचीत के दौरान कई ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने क्षेत्र के सचिव, सरपंच अथवा स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ लाए गए हैं। कुछ लोगों का कहना था कि उन्हें यह तो बताया गया कि ग्वालियर जाना है, लेकिन कार्यक्रम किसका है, किस विषय पर है और कौन-कौन नेता आ रहे हैं—इसकी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं थी।
बताया जा रहा है कि भिंड, मुरैना, आरोन, पिछोर, सेवढ़ा, भितरवार, डबरा सहित अंचल के अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों को लाया गया। महिलाओं और ग्रामीणों के समूहों में भी यही सवाल सुनाई दिया कि वे आखिर किस कार्यक्रम में आए हैं और उन्हें यहां क्यों लाया गया है। अगर यह स्थिति व्यापक स्तर पर सही है तो यह किसान सम्मेलन की अवधारणा पर ही गंभीर सवाल खड़ा करती है। किसान को सरकारी कार्यक्रम में बुलाना अलग बात है और उसे कार्यक्रम की जानकारी दिए बिना केवल भीड़ का हिस्सा बनाकर लाना अलग।
किसान के नाम पर आयोजन, लेकिन किसान नेतृत्व की तस्वीर ही गायब!
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कार्यक्रम का केंद्रीय विषय किसान कल्याण और कृषि समृद्धि था, उसकी प्रचार सामग्री में प्रदेश के कृषि मंत्री और देश के केंद्रीय कृषि मंत्री को स्थान क्यों नहीं मिला? और यदि यह केवल तकनीकी अथवा डिजाइन संबंधी चूक थी, तो फिर अंचल के दो प्रमुख नेताओं सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर की अनुपस्थिति भी इसी तरह की चूक कैसे हो गई?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंपलेट महज एक कागज नहीं होता। वह बताता है कि आयोजक किसे कार्यक्रम का चेहरा मानता है और किसे नहीं। यह दर्शाता है कि पार्टी प्रोटोकॉल से बढ़कर आयोजन की नजर में किसकी क्या अहमियत है!
ऐसे में किसान समृद्धि सम्मेलन के बाद अब चर्चा घोषणाओं की कम और इस बात की ज्यादा है कि क्या किसान वास्तव में कार्यक्रम का केंद्र था या किसान के नाम पर जबरिया बच्चों, महिलाओं एवं वृद्धो की भीड़ दिखाना ही कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि बना दिया गया?
युग क्रांति का सवाल सीधा है—अगर किसान के लिए सम्मेलन था, तो किसानों को कार्यक्रम की जानकारी क्यों नहीं थी? और अगर आयोजन इतना बड़ा था, तो कृषि विभाग के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरों को ही प्रचार सामग्री से बाहर क्यों रखा गया?
