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कॉलोनी में 50 रैंप हटाने निगम का बुलडोजर चला, हाईवे की सर्विस रोड पर कब्जों से कब हटेगा अतिक्रमण?

ग्वालियर में नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल: क्षेत्र क्रमांक 14 में घरों के रैंप हटाए, गोला का मंदिर–महाराजपुरा भिंड रोड और दीनदयाल नगर–शताब्दीपुरम मार्ग की सर्विस रोड पर स्थायी कब्जों पर निगम आयुक्त कब लेंगे संज्ञान?

ग्वालियर 13 अक्टूबर 2026। निगम आयुक्त का पदभार ग्रहण करने साथ ही अभिषेक चौधरी एक्शन मोड में दिख रहे हैं, जिसके अंतर्गत सड़क पर आवागमन बाधित करने वाले अतिक्रमणों के खिलाफ नगर निगम का बुलडोजर चला और क्षेत्र क्रमांक 14 में करीब 50 घरों के रैंप हटा दिए गए। निगम ने इसे यातायात सुगम बनाने और सार्वजनिक मार्गों को बाधामुक्त करने की कार्रवाई बताया है।

लेकिन शहर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की प्राथमिकता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। जब कॉलोनी के भीतर आवागमन में बाधा बने रैंप हटाए जा सकते हैं, तो शहर के प्रमुख मार्गों की सर्विस रोड पर कथित रूप से स्थायी कब्जा जमाकर बैठे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?

कॉलोनी के रैंप पर कार्रवाई, मुख्य मार्गों की सर्विस रोड का क्या?

नगर निगम ग्वालियर ने क्षेत्र क्रमांक 14 में सड़क किनारे बनाए गए लगभग 50 घरों के रैंप हटाए। क्षेत्राधिकारी अभय प्रताप सिंह तोमर के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य सड़क पर आवागमन की बाधाएं दूर करना और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना बताया गया है। सार्वजनिक सड़क पर बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन यही नियम शहर के प्रमुख मार्गों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।

भिंड रोड और पटरी रोड पर सर्विस रोड को लेकर गंभीर सवाल

गोला का मंदिर से महाराजपुरा की ओर जाने वाले भिंड रोड (हाईवे) पर सर्विस रोड की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी तरह दीनदयाल नगर से शताब्दीपुरम की ओर जाने वाली पटरी रोड की सहायक सर्विस रोड पर भी अतिक्रमण की शिकायत है। आरोप है कि दुकानदारों ने इन सर्विस रोडों पर स्थायी कब्जे कर लिए हैं, जिससे सड़क का उपयोग बाधित हो रहा है और आवागमन के लिए उपलब्ध जगह प्रभावित हुई है।

सर्विस रोड का उद्देश्य मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम करना और वाहनों को सुगम रास्ता उपलब्ध कराना है। यदि इन सड़कों पर ही कब्जे हो जाएं और आवागमन बाधित होने लगे, तो यातायात सुधारने की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में केवल कॉलोनियों के भीतर कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय निगम को शहर के प्रमुख मार्गों की सर्विस रोडों की स्थिति का भी परीक्षण करना चाहिए।

अब निगम आयुक्त की जवाबदेही का सवाल

सवाल यह नहीं है कि घरों के रैंप हटाने की कार्रवाई क्यों की गई, बल्कि सवाल यह है कि अतिक्रमण हटाने का अभियान शहर के सभी प्रभावित मार्गों पर समान रूप से क्यों नहीं दिखाई देता? क्या नगर निगम भिंड रोड और दीनदयाल नगर–शताब्दीपुरम मार्ग की सर्विस रोडों का निरीक्षण कराएगा? क्या सार्वजनिक सड़क पर कथित स्थायी कब्जों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई होगी? और सबसे अहम सवाल—नगर निगम आयुक्त इन शिकायतों पर कब संज्ञान लेंगे? यद्यपि अभिषेक चौधरी को निगम आयुक्त की कमान संभाले कम समय हुआ है लेकिन निगम से यह सवाल बनते है।

नगर निगम की कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब अतिक्रमण हटाने का अभियान बिना भेदभाव सार्वजनिक मार्गों की वास्तविक जरूरत के अनुरूप चलाया जाए। करीब 50 घरों के रैंप हटाने की कार्रवाई के बाद अब शहरवासियों की निगाहें उन प्रमुख सर्विस रोडों पर हैं, जहां कथित कब्जों के कारण सड़क की उपयोगिता प्रभावित होने की शिकायत है। निगम आयुक्त को इन मार्गों की स्थिति की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि अतिक्रमण हटाने का संदेश केवल कॉलोनियों तक सीमित न रहे, बल्कि शहर की प्रमुख सड़कों पर भी दिखाई दे।