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ग्वालियर की पहली महिला कलेक्टर रुचिका चौहान के दो साल

संवेदनशीलता, सख्ती और नवाचार से बनी अलग पहचान

ग्वालियर। रुचिका चौहान ने ग्वालियर के कलेक्टर के रूप में अपना दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि केवल समय की दृष्टि से नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रभाव और जनसंवेदनशीलता के कारण भी उल्लेखनीय मानी जा रही है। ग्वालियर जिले की पहली महिला कलेक्टर के रूप में उनकी पदस्थापना के समय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में कई तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं कि क्या ग्वालियर जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में महिला कलेक्टर प्रभावी ढंग से काम कर पाएगी।

लेकिन बीते दो वर्षों में रुचिका चौहान ने अपने कार्य और निर्णय क्षमता से इन सभी आशंकाओं को काफी हद तक गलत साबित किया है। प्रशासनिक सजगता, सक्रियता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने उनके कार्यकाल को अलग पहचान दी है।

संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

कलेक्टर चौहान की कार्यशैली में संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। बताया जाता है कि किसी भी बड़ी घटना, विशेषकर दुर्घटना की सूचना मिलने पर वे देर रात भी मौके या अस्पताल तक पहुंचने में संकोच नहीं करतीं।

उन्होंने कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई छोटे लेकिन प्रभावी निर्णय भी लिए। कलेक्ट्रेट आने वाली महिलाओं के बच्चों के लिए स्टे होम की व्यवस्था और पहाड़ी पर स्थित कलेक्ट्रेट तक पहुंचने में दिव्यांगजनों को होने वाली परेशानी को देखते हुए नीचे से वाहन सुविधा उपलब्ध कराना ऐसे फैसले हैं, जो प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।

‘शक्ति दीदी’ पहल से महिलाओं को रोजगार

कलेक्टर रुचिका चौहान की कारवाइयांमहिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी उनके कार्यकाल में एक उल्लेखनीय पहल देखने को मिली। “शक्ति दीदी” योजना के तहत पेट्रोल पंपों पर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। आज ग्वालियर के कई पेट्रोल पंपों पर महिलाएं पेट्रोल-डीजल भरते हुए दिखाई देती हैं।
इस पहल को न केवल प्रदेश बल्कि देश के कई हिस्सों में सराहना मिली। इससे महिलाओं को रोजगार मिला, साथ ही पेट्रोल पंपों का माहौल भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सकारात्मक हुआ।

सरकारी जमीन बचाने में सख्ती

प्रशासनिक स्तर पर उन्होंने सरकारी जमीनों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। कोर्ट में सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों में एकतरफा फैसलों की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकारी पक्ष को मजबूत किया गया। इसके परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीनें फिर से शासन के पक्ष में वापस आईं।

कानून व्यवस्था पर भी मजबूत पकड़

जहां एक ओर वे संवेदनशील निर्णयों के लिए जानी जाती हैं, वहीं कानून व्यवस्था के मामलों में उनकी सख्ती भी देखने को मिलती है। कई मौकों पर वे खुद मैदान में उतरकर स्थिति का जायजा लेती नजर आईं। प्रशासनिक संतुलन और राजनीतिक समन्वय बनाए रखने की उनकी क्षमता भी इस कार्यकाल में सामने आई।

प्रभावी नेतृत्व की पहचान

ग्वालियर की पहली महिला कलेक्टर के रूप में रुचिका चौहान का दो वर्ष का कार्यकाल अब तक प्रभावी और उल्लेखनीय माना जा रहा है। प्रशासनिक समझ, लोगों को परखने की क्षमता और संवेदनशील दृष्टिकोण ने उनके नेतृत्व को विशिष्ट बनाया है।

दो वर्षों का यह सफर यह संकेत देता है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता साथ हों, तो किसी भी चुनौतीपूर्ण जिले में प्रभावी प्रशासन स्थापित किया जा सकता है। उनके इस सफल कार्यकाल पर बहुत-बहुत बधाई।