भिंड-मिहोना-गोपालपुर रोड पर MPRDC के दस्तावेज़ों ने खोली नई परत, 4 किमी आगे नया चेक बैरियर बनाने की मंजूरी भी सवालों में
भिंड/ग्वालियर। भिंड-मिहोना-गोपालपुर टोल प्लाजा को लेकर युग क्रांति के पहले खुलासे के बाद अब दूसरा बड़ा खुलासा सामने आया है। एमपी रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के आधिकारिक दस्तावेज़ बताते हैं कि वर्तमान में इस सड़क पर BOT (Build-Operate-Transfer) नहीं बल्कि User Fee Collection Agreement के तहत टोल वसूली कराई जा रही है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी अब भी इसे BOT परियोजना बताकर नियमों और वास्तविक व्यवस्था को लेकर भ्रम की स्थिति बना रहे हैं।
11 मई 2026 को हुए Agreement No. 1092/2026 के अनुसार ग्वालियर की मुरली कंस्ट्रक्शन को 24 माह के लिए केवल User Fee Collection का कार्य सौंपा गया है। समझौते में कहीं भी BOT रियायत का उल्लेख नहीं है। इसके बाद 10 जून 2026 को एमपीआरडीसी ने इसी ठेकेदार के अनुरोध पर टोल प्लाजा से लगभग चार किलोमीटर आगे अतिरिक्त चेक बैरियर स्थापित करने की अनुमति भी दे दी।
यूजर फी का अनुबंध, लेकिन वसूली BOT जैसी
दस्तावेज़ साफ बताते हैं कि ठेका केवल उपभोक्ता शुल्क संग्रहण का है, लेकिन मौके पर स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टोल पर ट्रैक्टर जैसे वाहनों से भी शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि टोल संचालन के नियमों और श्रेणियों को लेकर पारदर्शिता नजर नहीं आती।
सबसे हैरानी की बात यह है कि टोल प्लाजा पर स्वीकृत दरों का बोर्ड तक नहीं लगा है, जबकि यात्रियों को यह जानने का अधिकार है कि किस वाहन पर कितना शुल्क निर्धारित है। इसके अलावा फास्टैग की व्यवस्था भी नहीं है, जिससे डिजिटल भुगतान और पारदर्शी वसूली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
MPRDC ने तय की हैं ये टोल दरें
29 अगस्त 2025 को जारी एमपीआरडीसी के आदेश के अनुसार 50.86 किलोमीटर लंबे भिंड-मिहोना-गोपालपुर मार्ग पर निम्न दरें लागू हैं—
कार (Car) – ₹40 प्रति ट्रिप
हल्का वाणिज्यिक वाहन (LCV) – ₹95 प्रति ट्रिप
बस – ₹195 प्रति ट्रिप
ट्रक – ₹235 प्रति ट्रिप
मल्टी एक्सल ट्रक – ₹465 प्रति ट्रिप
मासिक पास – ₹110
4 किलोमीटर आगे चेक बैरियर क्यों?
10 जून 2026 के एमपीआरडीसी के पत्र में अतिरिक्त चेक बैरियर लगाने का कारण “ट्रैफिक डायवर्जन रोकना और राजस्व रिसाव (Revenue Leakage) रोकना” बताया गया है। जबकि इसका कोई विकल्प नहीं है।
लेकिन स्थानीय सूत्रों का दावा है कि वास्तविक कहानी कुछ और है।_टोल प्लाजा से गोपालपुर की ओर लगभग दो किलोमीटर बाद उमरी-फूप-प्रतापपुर मार्ग इस सड़क से जुड़ता है। इसी मार्ग पर करीब 11-12 किलोमीटर आगे पहले से ही BOT मॉडल का दूसरा टोल प्लाजा संचालित है। ऐसी स्थिति में यदि नया चेक बैरियर टोल प्लाजा से चार किलोमीटर आगे लगाया जाता है तो आशंका है कि उमरी-प्रतापपुर मार्ग की ओर जाने वाले वाहनों से भी इसी बैरियर पर शुल्क वसूला जा सकता है, जबकि आगे उन्हें दूसरे टोल पर भी भुगतान करना पड़ेगा। यदि ऐसा होता है तो यात्रियों पर दोहरी टोल वसूली का बोझ पड़ सकता है।
क्या चेक बैरियर बन जाएगा वसूली का नया केंद्र?
सूत्रों का आरोप है कि प्रस्तावित चेक बैरियर केवल ट्रैफिक डायवर्जन रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौके के अनुसार खनिज, परिवहन अथवा अन्य विभागों की जांच चौकी जैसी भूमिका भी निभा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वाहनों की अतिरिक्त रोक-टोक और मनमानी वसूली की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। इस संबंध में एमपीआरडीसी और संबंधित ठेकेदार का पक्ष लिया जाना शेष है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
- जब वर्तमान अनुबंध केवल User Fee Collection का है तो इसे BOT परियोजना क्यों बताया जा रहा है?
- टोल प्लाजा पर अधिकृत रेट लिस्ट और फास्टैग व्यवस्था क्यों नहीं है?
- चार किलोमीटर आगे चेक बैरियर लगाने की वास्तविक आवश्यकता क्या है?
- क्या इससे दूसरे मार्ग पर जाने वाले वाहनों से भी टोल वसूला जाएगा?
- यदि आगे पहले से BOT टोल मौजूद है तो यात्रियों को दोहरी वसूली से कौन बचाएगा?
- क्या एमपीआरडीसी इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएगा?
अब देखना यह होगा कि भोपाल मुख्यालय में बैठे टोल प्रबंधन एवं संचालन अधिकारी के साथ स्थानीय लेवल के निगरानी अधिकारी की इस पर आगे क्या भूमिका रहती है!
