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राजधानी भोपाल में बुल मदर फार्म में ‘हरित संहार’!

अशोक और आम के बाद अब रुद्राक्ष के वृक्षों पर आरी चलाने की तैयारी, पर्यावरण हत्या पर उठे सवाल

भोपाल। प्रदेश के प्रतिष्ठित बुल मदर फार्म (BMF) में हरित संपदा के व्यवस्थित विकास की वर्षों की मेहनत पर अब कथित तौर पर आरी चल रही है। आरोप है कि यहां के प्रबंधक द्वारा पहले अशोक वाटिका और आम वाटिका में बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई कराई गई और अब न्याय वाटिका में लगे रुद्राक्ष के वृक्षों को काटने की तैयारी की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार बुल मदर फार्म परिसर में लगे 50 से अधिक अशोक के 10–12 वर्ष पुराने 25–30 फुट ऊंचे वृक्षों को कटवा दिया गया। वहीं आम वाटिका में लगे 200 से अधिक पौधों की ‘छंटाई’ के नाम पर भारी कटाई किए जाने की बात सामने आई है। इस गणतंत्र दिवस पर सुसज्जित अशोक वृक्षों को अब मौके पर नहीं देखा जा सकता क्योंकि यह सभी पेड़ भी प्रबंधक की विकृत मानसिकता का शिकार हो गए।

अब रुद्राक्ष के पेड़ों की बारी?

जानकारी के अनुसार अब निशाने पर न्याय वाटिका में लगे रुद्राक्ष के पेड़ हैं। इन पेड़ों की खास बात यह है कि इन पर हर साल लगभग एक से डेढ़ क्विंटल रुद्राक्ष फलते हैं

इन वृक्षों को कई बड़े संवैधानिक पदों पर रहे गणमान्य व्यक्तियों और न्यायाधीशों द्वारा लगाया गया था, जिनमें प्रमुख नाम हैं—राज्यपाल आनंदीबेन पटेल,पूर्व राज्यपाल राम नरेश यादव, मंगू भाई पटेल, लालजी टंडन के अलावा न्यायपालिका से जुड़े कई वरिष्ठ नाम—न्यायमूर्ति रोहित आर्य, न्यायमूर्ति एम.के. गुप्ता, न्यायमूर्ति सत्येंद्र सिंह, न्यायमूर्ति डी.के. पालीवाल, न्यायमूर्ति एम.पी. तिवारी, न्यायमूर्ति मधुसूदन मिश्रा, न्यायमूर्ति सुरेश सिंह

काटे गए पेड़जनप्रतिनिधियों में शिवराज सिंह चौहान, डॉ. मोहन यादव, पुरुषोत्तम रुपाला समेत कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय अधिकारियों ने भी यहां वृक्षारोपण किया था।

नाम पट्टिकाएं और फोटोग्राफ भी हटाए गए

आरोप है कि इन वृक्षों के सामने लगी अतिथियों के नाम की पट्टिकाएं और उनके द्वारा वृक्षारोपण के समय खिंचवाए गए फोटोग्राफ भी हटा दिए गए हैं। युग क्रांति द्वारा मामले को संज्ञान लेते हुए भोपाल महापौर एवं संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर चर्चा उपरांत कल अधिकांश पट्टिकाए दोबारा लगाई गई है।

बताया जाता है कि पिछले 10–12 वर्षों में इस प्रक्षेत्र में लगभग 1000 से अधिक फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए थे, जिनमें प्रमुखता जामुन,आम, अमरूद, बेलपत्र, कटहल, सीताफल, कदंब, गुलमोहर, अमलतास, बेर, इमली नीम, बरगद, पीपल, बहेड़ा, कबीट, बादाम आदि शामिल है।

ये सभी पौधे समय-समय पर आने वाले मुख्य अतिथियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए थे।

मॉडल प्रक्षेत्र माना गया है BMF

बुल मदर फार्म को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के न्यायमूर्ति दिलीप सिंह सहित अन्य विशेषज्ञों ने मॉडल प्रक्षेत्र के रूप में माना है। यहां किए जा रहे अनुसंधान कार्यों—ETT तकनीक, IVF, सेक्स सॉर्टेड सीमन, फ्रोजन सीमन तकनीक की भी सराहना की गई है। यह क्षेत्र देश का पहला प्रक्षेत्र माना जाता है और सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक में देश की दूसरी प्रयोगशाला भी यहीं स्थापित है।

यहीं से पूरे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, सेक्स सॉर्टेड सीमन और तरल नाइट्रोजन के कोल्ड चेन नेटवर्क का संचालन होता है।

गरुड़ पुराण में वृक्ष काटने को बताया गया महापाप

हिंदू धर्मग्रंथ में बिना कारण वृक्ष काटने को गंभीर पाप बताया गया है। इसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति जीवनदायी वृक्षों को नष्ट करता है, उसे मृत्यु के बाद असिपत्रवन नरक जैसे कठोर दंड भोगने पड़ते हैं।

धार्मिक दृष्टि से वृक्षों को जीवों का आश्रय माना गया है और उनकी कटाई को प्रकृति की हत्या के समान माना गया है।

सवालों के घेरे में प्रबंधन

बीएमएफ की प्रबंधक डॉ मंजू ने अपने कुतर्कों में कहा कि “एक डॉग करंट से मर गया था इसलिए अशोक के वृक्षों को कटवाना पड़ा, हालांकि हमने जो पुराने पेड़ों की छंटाई एवं कटाई की है उसके बदले में प्लांटेशन कर रही हूं”

सवाल उठ रहे हैं कि यदि प्रशासन को पूर्व अधिकारियों से कोई नाराजगी या विवाद है तो कार्रवाई उन पर होनी चाहिए, लेकिन वर्षों में विकसित हुई हरित संपदा को नष्ट क्यों किया जा रहा है?

पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रुद्राक्ष और अन्य फलदार वृक्षों की कटाई नहीं रोकी गई तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि प्रदेश की एक महत्वपूर्ण अनुसंधान धरोहर को भी नुकसान पहुंचाएगा।