लंबे कारावास और साक्ष्यों के अभाव को बताया आधार
नई दिल्ली 16 मार्च 2026। भारत के सर्वोच्च न्यायालय की माननीय न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और माननीय न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने सत्यजीत भोई को नियमित जमानत दे दी है। न्यायालय ने माना कि मुकदमे से पहले लंबी कैद और आरोपी तथा जब्त पदार्थ के बीच स्पष्ट संबंध (Nexus) की कमी इस राहत के मुख्य आधार हैं।
याचिकाकर्ता का कानूनी प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अनिंदिता पुजारी, अधिवक्ता शैलेश्वर यादव, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) रोहित कुमार, अधिवक्ता राधिका महापात्रा एवं शैलेंद्र सिंह भी शामिल थे।
मामले की पृष्ठभूमि..
अपीलकर्ता के खिलाफ छत्तीसगढ़ के सिंघोड़ा थाने में 25 मार्च, 2024 को NDPS अधिनियम की धारा 20(B) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भोई उस ट्रक में यात्री थे जिससे 150 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। 14 जुलाई, 2025 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अपीलकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था।
न्यायालय की मुख्य टिप्पणियां..
साक्ष्यों का अभाव: अदालत ने पाया कि यात्री के रूप में मौजूद अपीलकर्ता और बरामद नशीले पदार्थ के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित करने वाला साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है।
लंबी कैद: अपीलकर्ता लगभग दो साल से जेल में थे।
सुनवाई में देरी: न्यायालय ने नोट किया कि 15 गवाहों की जांच अभी बाकी है, जिससे मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना कम है।
न्यायालय का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करे। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अपीलकर्ता को मुकदमे में पूर्ण सहयोग करना होगा और वह गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करेगा।
