फिर खत्म हई समय सीमा टूटी, गुणवत्ता भी सवालों में..
ग्वालियर 3 अप्रैल 2026। करोड़ों की लागत से चल रहे आधुनिक रेलवे स्टेशन निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी और “गुणवत्ता में समझौते” के आरोपों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की तमाम हिदायतों के बावजूद जब ज़मीन पर प्रगति संतोषजनक नहीं दिखी, तो ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह को मजबूरन संसद में मामला उठाना पड़ा।
यह परियोजना मूलतः दिसंबर 2024 तक पूरी हो जानी थी, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक दो बार समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है और तीसरे टाइम एक्सटेंशन की तैयारी चल रही है।
संसद तक पहुंची जनता की परेशानी
सांसद कुशवाह ने क्षेत्र की जनता और यात्रियों को हो रही लगातार परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए कल दिनांक 02-04- 2026 को सदन का ध्यान आकर्षित किया। आमतौर पर कोई मुद्दा संसद/सदन तक तभी पहुंचता है जब हालात बेहद बिगड़ चुके हों और जिम्मेदार एजेंसियां शिकायतों पर “अंधी-बहरी” बनी रहें। यह कदम इस बात का संकेत है कि मामला अब केवल देरी तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
ज्ञातव्य है कि अनुबंध के अनुसार यह कार्य KPC कंपनी को दिसंबर 2024 तक पूरा करना था। मगर पहला टाइम एक्सटेंशन अगस्त 2025, दूसरा एक्सटेंशन: मार्च 2026 तक और तीसरा एक्सटेंशन प्रस्तावित है। स्थिति यह है कि अब परियोजना की अंतिम समय-सीमा क्या होगी, यह खुद संबंधित विभाग भी स्पष्ट नहीं कर पा रहा है।
500 करोड़ की परियोजना पर गुणवत्ता के गंभीर सवाल
करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इस

परियोजना में निर्माण गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।युग क्रांति मीडिया पहले भी इन गड़बड़ियों को उजागर कर चुका है, और अब ज़मीनी निरीक्षण में जो सामने आया है, वह चिंताजनक है—
पोस्ट ऑफिस भवन: *इसकी टाइल्स दो साल के भीतर ही उखड़ने और टूटने लगीं,* लाइट, सेनेटरी और प्लंबिंग में खराब सामग्री के संकेत, *सीवर चैंबर ब्लॉक, अन्य नई इमारतों की दीवारों पर दरारें (जिन्हें रिपेयर किया गया)
यह हाल तब है जब भवनों का उपयोग अभी शुरू ही हुआ है और प्रोजेक्ट पूरा तक नहीं हुआ है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह भवन हैंडोवर नहीं किया गया है।
अनुबंध की शर्तें है बेअसर
मेंटेनेंस की शर्तें भी बेअसर साबित हो रही है। अनुबंध के अनुसार निर्माण कर्ता KPC कंपनी को दो वर्षों तक इन खामियों का स्थायी समाधान करना अनिवार्य है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक—न ठेकेदार कंपनी शिकायतों पर गंभीरता दिखा रही है और न ही रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं
लगातार बढ़ती लागत, खिसकती समय-सीमा और गुणवत्ता मापदंडों को अनुदेखा अथवा उनसे समझौता_ तीनों मिलकर इस परियोजना को सवालों के घेरे में खड़ा कर चुके हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संसद में मुद्दा उठने के बाद_क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? क्या निर्माण कर्ता कंपनी को जवाबदेह ठहराया जाएगा? फिलहाल, ग्वालियर की जनता के सवाल अपने सांसद के जरिए इस बार सीधे सत्ता के दरवाजे तक पहुंच चुके हैं।
