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नामांतरण के लिए 30 हजार! पहली किस्त के 5 हजार लेते पटवारी गिरफ्तार—भिंड में रिश्वत का यह खेल कितना गहरा?

सरकारी काम की कीमत तय कौन कर रहा है_व्यवस्था या रिश्वतखोरी का ‘रेट कार्ड’?

भिंड 27 अगस्त 2026। जमीन का नामांतरण कराने के लिए एक किसान को सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने पड़े और आखिरकार मामला लोकायुक्त के ट्रैप तक पहुंच गया। मेहगांव क्षेत्र के सिमार हल्के में पदस्थ पटवारी संजय बघेल को ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने कथित तौर पर 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि शिकायतकर्ता के अनुसार जमीन के नामांतरण के लिए पहले 30 हजार रुपये मांगे गए थे। विरोध के बाद कथित तौर पर सौदा 10 हजार रुपये में तय हुआ और इसे दो किस्तों में देने की बात हुई। पहली किस्त के 5 हजार रुपये लेते ही लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई कर दी।

दो महीने से अटका नामांतरण, फिर लोकायुक्त तक पहुंची शिकायत

सूत्र के मुताबिक शिकायतकर्ता ने पत्नी के नाम करीब तीन महीने पहले जमीन खरीदी थी। नामांतरण के लिए पटवारी से संपर्क किया गया, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त से संपर्क किया और बातचीत से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराए। इसके बाद ट्रैप की कार्रवाई की गई।

लोकायुक्त ने कार्रवाई के बाद आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

सवाल सिर्फ 5 हजार का नहीं, उस ‘30 हजार’ की मांग का है

एक पटवारी का ट्रैप होना निश्चित रूप से कार्रवाई की सफलता है, लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि आम आदमी को जमीन के नामांतरण जैसे वैधानिक काम के लिए रिश्वत की मांग का सामना क्यों करना पड़ता है?

अगर शिकायतकर्ता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो सवाल केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा। सवाल यह भी होगा कि राजस्व विभाग में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व सेवाओं के लिए आम नागरिकों को कितने चक्कर लगाने पड़ते हैं और कितने मामलों में काम कराने के लिए अनौपचारिक भुगतान की मांग की जाती है?

लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक मामले में रिश्वतखोरी को पकड़ लिया है, लेकिन अब प्रशासन के सामने असली चुनौती यह है कि ऐसी शिकायतें केवल ट्रैप की कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि उस व्यवस्था की भी जांच हो जिसमें सरकारी सेवा को कथित तौर पर ‘पैसे देकर जल्दी’ और ‘बिना पैसे के लंबा इंतजार’ करने से जोड़ दिया जाता है।यही वह सवाल है जिसका जवाब भिंड के साथ-साथ पूरे राजस्व तंत्र को देना चाहिए।