ग्वालियर स्टेशन पर विशेष जांच अभियान में 17 कैरेट पानी की बोतलें मिलीं, स्टॉल-कैंटीनों से खाद्य पदार्थों के नमूने भोपाल भेजे
ग्वालियर, 08 सितंबर 2026। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को विशेष जांच अभियान में ट्रेन क्रमांक 12138 पंजाब मेल की पेंट्रीकार से 200 से अधिक ऐसी पानी की बोतलें जब्त की गईं, जिन पर एक्सपायरी डेट, निर्माता का विवरण और आवश्यक लेबलिंग नहीं थी। विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट, ग्वालियर श्री अतुल यादव के निर्देशन में हुई कार्रवाई के दौरान प्लेटफार्मों पर संचालित स्टॉल और कैंटीनों की भी जांच की गई तथा खाद्य सामग्री के नमूने परीक्षण के लिए भोपाल स्थित राज्य प्रयोगशाला भेजे गए।
पेंट्रीकार की जांच में विक्रय के लिए रखी 17 कैरेट में 200 से अधिक अनधिकृत पानी की बोतलें मिलीं। जांच दल ने इन्हें जब्त कर पेंट्रीकार से उतरवाया और संबंधित प्रबंधक के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्लेटफार्म क्रमांक 1, 2 और 3 पर स्टॉल एवं कैंटीनों की जांच के दौरान बिना आवश्यक दस्तावेजों के खाद्य सामग्री बेचने वाले अनधिकृत विक्रेताओं पर भी कार्रवाई की गई। चॉकलेट, सैंडविच, बिस्किट, चोको डिलाइट स्लाइस केक और मैंगो ड्रिंक के नमूने लेकर जांच के लिए भोपाल भेजे गए हैं।
एक दिन की कार्रवाई, लेकिन सवाल कहीं ज्यादा बड़ा
विशेष जांच में आज जिस तरह अनधिकृत पानी की बोतलों और खाद्य सामग्री का मामला सामने आया है, उसने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को बेची जा रही खाद्य एवं पेय सामग्री की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक विशेष जांच अभियान में ही 200 से अधिक बिना आवश्यक लेबल वाली पानी की बोतलें पेंट्रीकार में मिल सकती हैं, तो नियमित जांच और निगरानी के दौरान जिम्मेदार विभागों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ी?
सूत्रों के अनुसार, रेलवे में अनधिकृत पानी और खाद्य सामग्री की बिक्री का खेल केवल ग्वालियर अथवा झांसी मंडल तक सीमित होने की आशंका नहीं है। इसके पीछे एक ऐसा तंत्र होने की चर्चा है, जिसकी जड़ें कई मंडलों और जोनों तक फैली हो सकती हैं। ऐसे में आज की कार्रवाई भले ही बड़ी पकड़ मानी जाए, लेकिन यह पूरे नेटवर्क की केवल एक कड़ी सामने आने जैसा मामला भी हो सकता है।
यहां रेलवे के कमर्शियल विभाग और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि बिना आवश्यक लेबल और निर्माता विवरण वाली बोतलें पेंट्रीकार तक पहुंच रही थीं और यात्रियों को बेचने के लिए रखी गई थीं, तो यह जांच का विषय है कि इन्हें ट्रेन तक पहुंचने और बिक्री के लिए उपलब्ध होने से पहले किस स्तर पर जांचा गया।
यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े इस मामले में केवल आज की जब्ती और कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। जरूरत इस बात की है कि रेलवे यह भी जांच करे कि ऐसी बोतलें कहां से आईं, किसने सप्लाई कीं, किन-किन ट्रेनों अथवा स्टेशनों पर इनकी आपूर्ति हो रही है और जिम्मेदार निगरानी तंत्र ने अब तक क्या कार्रवाई की।
प्लेटफार्म 1 से 4 तक अभियान के दौरान बिना टिकट यात्रा, रेलवे परिसर में गंदगी फैलाने तथा अनधिकृत रूप से रेल लाइन पार करने वाले लोगों के विरुद्ध भी नियमानुसार अर्थदंड की कार्रवाई की गई। विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट श्री अतुल यादव ने कहा कि यात्रियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर इस प्रकार के जांच अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।
कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी झांसी व आगरा डिवीजन श्री जनक सिंह, सीएचआई श्री जे.एस. चौहान एवं श्री तेजपाल, कैटरिंग इंस्पेक्टर श्री सुशील कुमार एवं श्री जायसवाल, सीटीआई श्री राजीव शर्मा सहित टीटीई स्टाफ, आरपीएफ और जीआरपी के कर्मचारी शामिल रहे।
