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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच की मांग

सात दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

भोपाल, 24 जून 2026। मध्य प्रदेश कांग्रेस के धर्म एवं मंदिर पुजारी प्रकोष्ठ ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं और यदि सात दिनों के भीतर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो देशव्यापी जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष साध्वी ऋचा गोस्वामी, प्रदेश संयोजक शिवनारायण शर्मा, सहसंयोजक ओंकारदास वैष्णव और कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर भारती सहित पुजारी संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।

मुकेश नायक ने कहा कि राम मंदिर परिसर में लगे कैमरों के बंद रहने और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर समय-समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने दान में मिली सोने-चांदी की राम शिलाओं तथा मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी प्रश्न उठाए। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि धर्म और आस्था के नाम पर जनता की भावनाओं का राजनीतिक उपयोग किया गया है तथा मंदिरों से जुड़े वित्तीय मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

साध्वी ऋचा गोस्वामी ने कहा कि 300 से अधिक कैमरों और चौबीस घंटे सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावा चोरी की घटनाएं सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संत समाज और अखाड़ों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की।

कांग्रेस ने उठाए ये प्रमुख सवाल

  • चढ़ावा चोरी के आरोपों में घिरे लोगों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • लगभग 3500 करोड़ रुपये के चंदे में से 2400 करोड़ रुपये का स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं है?
  • भूमि खरीद और प्रसाद वितरण से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई?
  • कारसेवकों के पुनर्वास और अयोध्या कॉरिडोर से प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
  • शुल्क आधारित दर्शन व्यवस्था क्यों लागू की गई?

प्रमुख मांगें

  • श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर संत समाज और अखाड़ों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाए।
  • आय-व्यय और चढ़ावे का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा नियमित ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।
  • वीआईपी दर्शन व्यवस्था समाप्त की जाए और श्रद्धालुओं से लिया जाने वाला दर्शन शुल्क बंद किया जाए।
  • मंदिर प्रबंधन में राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त कर संत समाज को जिम्मेदारी सौंपी जाए।

कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर भारती ने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो धर्माचार्यों, संत समाज और रामभक्तों के साथ व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।