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आदिवासी भीख नहीं, अपना अधिकार मांगता है, आदिवासी कोड की लड़ाई एक बार नहीं 100 बार लड़ेंगे: उमंग सिंघार

विश्व आदिवासी दिवस पर दसहरा मैदान में उमड़ा आदिवासी समाज, 22 से अधिक संगठनों के हजारों लोगों ने लिया हिस्सा

भोपाल 9 अगस्त 2026। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को भोपाल के दसहरा मैदान में मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में विशाल आदिवासी सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस सम्मेलन में 22 से अधिक आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों और हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत माता मंदिर चौराहे से विशाल रैली के साथ हुई। रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और ढोल-मांदल की थाप के साथ दसहरा मैदान पहुंचे। सम्मेलन स्थल पर आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और गौरव की जीवंत झलक देखने को मिली। पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रंग-बिरंगे आदिवासी परिधानों ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

“मैं नेता प्रतिपक्ष के नाते नहीं, समाज का हिस्सा होने के नाते आया हूं”

आदिवासी समाज को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि, मैं यहां नेता प्रतिपक्ष के नाते नहीं, बल्कि समाज का हिस्सा होने के नाते आया हूं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 22 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी समाज की है, लेकिन आज भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उनकी पहचान और अस्तित्व को खत्म करने की कोशिशें हो रही हैं। हमें मिलकर अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करनी है।”

श्री सिंघार ने कहा कि वे स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं और उन्हें पता है कि आदिवासी गांवों में किस तरह कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज स्वाभिमानी समाज है। आदिवासी भीख नहीं मांगता, वह सिर्फ अपना अधिकार मांगता है।

“आदिवासी कोड की लड़ाई एक बार नहीं, 100 बार लड़ेंगे”

श्री सिंघार ने कहा कि अंग्रेजों के समय आदिवासियों के लिए अलग कोड की व्यवस्था थी, तो आज आदिवासी समाज को उसका अपना आदिवासी कोड क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मध्यप्रदेश के 22 प्रतिशत से अधिक आदिवासी समाज की मांग है और इस मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा, हम आदिवासी समाज के लिए आदिवासी कोड की लड़ाई लड़ेंगे। हमें आने वाली पीढ़ी को आदिवासी कोड देना है। कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि आप एक राजनीतिक पार्टी में हैं, फिर आदिवासी कोड की बात क्यों करते हैं? मैंने साफ कहा कि मैं आदिवासी अधिकारों की बात एक बार नहीं, 100 बार करूंगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश का आदिवासी युवा अब जाग चुका है। वह अपने अधिकारों, अपनी पहचान और अपने भविष्य को लेकर सजग है और अपने अधिकार लेना जानता है। उन्होंने आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

सम्मेलन में आदिवासी समाज की एकजुटता और सामाजिक शक्ति का प्रदर्शन देखने को मिला। पारंपरिक ढोल-मांदल की थाप, आदिवासी नृत्य, पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को आदिवासी गौरव और स्वाभिमान के रंग में रंग दिया।