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वर्कशॉप या वसूली-शॉप? ‘ग्रीन बिल्डिंग’ के नाम पर 215 इंजीनियरों की हाजिरी

भोपाल 2 मई 2026। संस्कारधानी जबलपुर में हालिया प्रशासनिक विवाद के बाद लोक निर्माण विभाग ने साख संभालने के लिए “सस्टेनेबल फ्यूचर इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिस” के नाम पर आज और कल अर्थात 2-3 मई को भोपाल के मिंटो हॉल में वर्कशॉप रखी गई है। कागजों में यह तकनीकी प्रशिक्षण है, लेकिन हकीकत में इस आयोजन ने पूरे महकमे में सवालों का तूफान खड़ा कर दिया है।

प्रदेशभर से 215 इंजीनियरों को बुलाया गया है—चाहे उनका ग्रीन बिल्डिंग से कोई सीधा संबंध हो या नहीं। सड़क, पुल और नेशनल हाईवे देखने वाले इंजीनियर भी इस “ग्रीन क्लास” में शामिल कर दिए गए हैं, जिससे यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर यह ज्ञानवर्धन है या सिर्फ संख्या बढ़ाने का खेल।

खर्च का खेल और अंदरखाने की चर्चाएं

प्रदेश इस वक्त 42 डिग्री की भीषण गर्मी में झुलस रहा है। फील्ड में सड़क मरम्मत, पुल सुधार और जनगणना जैसे काम चरम पर हैं, लेकिन इसके बावजूद इंजीनियरों को साइट से हटाकर एसी हॉल में बैठाने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय सूत्र साफ तौर पर कह रहे हैं कि यह वर्कशॉप कम और “हाजिरी” ज्यादा लग रही है। कई जगहों पर काम की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन आदेश इतने सख्त हैं कि कोई खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा।

इसी बीच आयोजन के खर्च को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों का दावा है कि ठेकेदारों से व्यवस्था करवाई जा रही है और इंजीनियरों को भी “योगदान” के संकेत दिए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से यह चर्चा पूरे महकमे में फैल रही है, उसने पूरे आयोजन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि जिन ठेकेदारों के भुगतान पहले से अटके हुए हैं, उनके सामने “सिस्टम” को खुश रखने की मजबूरी है।

वर्कशॉप या ट्रांसफर सीजन की तैयारी?

सूत्रों की माने तो वर्कशॉप के साथ-साथ ट्रांसफर सीजन की आहट भी इस आयोजन को और संदिग्ध बना रही है। मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है कि यह जमावड़ा आने वाले तबादलों की जमीन तैयार करने का मंच बन सकता है। सूत्रों के मुताबिक अलग-अलग पदों के लिए “रेट” तय होने की बातें चल रही हैं। कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं है, लेकिन अंदर की हलचल इशारा कर रही है कि मामला सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है।

इसी बीच यह भी चर्चा है कि आयोजन को और वजनदार दिखाने के लिए मुख्यमंत्री की मौजूदगी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि ऊपर तक यह संदेश जाए कि सब कुछ व्यवस्थित और नियंत्रण में है। दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता जहां सार्वजनिक मंचों से स्वास्थ्य और खानपान पर संदेश देते हैं (“थाली सात्विक है, लेकिन मंशा?”), वहीं इस वर्कशॉप में कथित तौर पर सात्विक भोजन पर जोर दिए जाने की चर्चा भी विभाग के भीतर व्यंग्य का विषय बन गई है।

इन तमाम घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ा सवाल वही है, जो अब खुले तौर पर पूछा जाने लगा है—क्या यह वर्कशॉप वाकई ग्रीन बिल्डिंग की समझ बढ़ाने के लिए है या फिर “ग्रीन” के नाम पर कुछ और ही खेल चल रहा है? जिम्मेदार भले चुप हों, लेकिन हालात यह बता रहे हैं कि मामला सिर्फ एक वर्कशॉप का नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर उठते गंभीर सवालों का है ?